नई दिल्ली, जेएनएन। जिन बेल वाली सब्जियों की आवक आमतौर पर मध्य मार्च से लेकर अप्रैल की शुरुआत में होती है, आजकल बाजार में समय से पहले खूब नजर आ रही हैं। कृषि विज्ञानियों का कहना है कि किसान अब समय के हिसाब से ढलने लगे हैं। वे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर समय से पहले ही सब्जियां उगा रहे हैं। इससे उन्हें जहां अच्छी खासी कीमत मिल जाती है वहीं ग्राहकों को भी समय से पहले इन सब्जियों का स्वाद चखने को मिल जाता है। जो सब्जियां आजकल बाजारों में नजर आ रही हैं, उनमें खीरा, घीया, ककड़ी, करेला शामिल हैं। 

 उजवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के बागवानी विज्ञानी राकेश कुमार बताते हैं कि उत्तर प्रदेश व राजस्थान के कई हिस्सों में आजकल रो टनल प्रचलन में है। इस विधि के अंतर्गत किसान क्यारियों के ऊपर पौधों के नजदीक अर्धचंद्राकार आकृति में तार लगाते हैं। इसके बाद क्यारी को पारदर्शी प्लास्टिक से ढक दिया जाता है। प्लास्टिक में जगह जगह छिद्र कर दिया जाता है ताकि वाष्पोत्सर्जन की क्रिया हो सके। इससे कड़ाके की ठंड में भी पौधे सही सलामत रहते हैं। 

 तापमान में बढ़ोतरी होने पर प्लास्टिक को हटा दिया जाता है। इसके बाद पौधे का विकास तीव्र गति से होता है। इस बार फरवरी के महीने में जब तापमान में बढ़ोतरी हुई तो किसानों ने प्लास्टिक की परत को हटा दिया। हालांकि आमतौर पर इसे मार्च की शुरुआत में हटाया जाता है।

अभी दूसरे राज्यों से आ रहा है खीरा-ककड़ी : राधेश्याम शर्मा

वहीं, चौधरी चेतराम सब्जी मंडी के चेयरमैन राधेश्याम शर्मा खीरा और ककड़ी को पाली हाउस में रखकर मांग के मुताबिक बाजार में बिक्री के लिए लाने से इत्तेफाक नहीं रखते। इनका कहना है कि यहां की मंडियों में देश के विभिन्न हिस्सों से सब्जियां और फल मंगाए जाते हैं। केशोपुर सब्जी मंडी में महज सब्जियां आती हैं। यहां की मंडी में अभी खीरा और ककड़ी दूसरे राज्यों से पहुंच रही हैं। कुछ दिनों बाद क्षेत्रीय इलाकों में खीरा-ककड़ी आना शुरू हो जाएगी।

दैनिक जागरण से बातचीत में राधेश्याम शर्मा ने कहा कि अभी ककड़ी राजस्थान से आ रहा है। खीरा बरेली की तरफ से मंडियों में पहुंच रहा है। कुछ दिनों में यहां पर लोकल स्तर पर खीरा और ककड़ी मिलना शुरू हो जाएगा। इन्होंने यह भी कहा कि यह नहीं भूलना चाहिए कि एक ही माह में देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम अलग-अलग रहता है। उसी के अनुरूप पैदावार होती रहती है और वही पैदावार मंडियों में पहुंचती रहती है। दूसरे राज्यों की सब्जियां क्षेत्र के किसानों के द्वारा लाई गई सब्जियों से महंगी होती है।

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