मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

नई दिल्ली, (नेमिष हेमंत)। वह राजनेता थीं, पर भारतीयों के लिए घर के एक सदस्य की तरह उनके घर और दिल के दरवाजे हर वक्त खुले रहते थे। तभी तो जब घर का कोई सदस्य परेशान या मायूस होता और बात उन तक जाती तो वे आगे बढ़कर उसका हाथ थाम लेती थीं। तमाम लोग हैं जिनके पास सुषमा स्वराज से जुड़ी यादें हैं। ऐसा ही एक किस्सा बाताया मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद साबरीन ने। वे बताते हैं कि 2015 में दिल्ली एक परिवार ने उनसे हज पर जाने की ख्वाहिश जताई, लेकिन पैसे के अभाव में उनकी यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो रही थी।

सरकारी खर्च पर भेजा था हज

यह बात उन्होंने सुषमा स्वराज को बताई तो उन्होंने परिवार के सदस्यों को सरकारी खर्चे पर हज भेजने की व्यवस्था कराई। परिवार में कुल चार सदस्य थे, जो उस साल हज यात्र पर जा सके। साबरीन एक और किस्सा बताते हैं कि जब केंद्र में मनमोहन सरकार थी और तब के भाजयूमो के अध्यक्ष व अब केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर 26 जनवरी को कश्मीर में तिरंगा फहराने गए थे।

उन्हें एक दिन पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया। तब उस समय के भाजपा के अध्यक्ष व अब केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ सुषमा 25 जनवरी की रात को राजघाट पर धरने पर बैठी थीं। वहां उपस्थित सभी लोगों के लिए गर्म दूध की व्यवस्था की गई। मिट्टी के गिलास में दूध पीने के बाद उनमें नई ताजगी आ गई और बहुत खुश होकर दूध का इंतजाम करने वाले कार्यकर्ताओं की खूब तारीफें करते हुए दुआएं दी।

चांदनी चौक भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुमन गुप्ता बताते हैं कि वह ऐसी वक्ता थीं, जिन्हें सुनने के लिए हर धर्म, संप्रदाय के लोग घंटों इंतजार करते थे। आटो पार्ट्स व्यापारी व आम आदमी पार्टी ट्रेड विंग के संयोजक बृजेश गोयल बताते हैं कि वह व्यापारी भाईयों की समस्याओं को लेकर मंच पर आ जाती थीं। 

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Posted By: Prateek Kumar

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