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GTB अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में रेजिडेंट डॉक्टरों पर हमले का आरोप, हड़ताल पर गए चिकित्सक

Delhi News डॉक्टरों ने सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की है। मांग पूरी होने तक हड़ताल खत्म नहीं करने की चेतावनी दी है। वहीं दूसरे पक्ष ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। चिकित्सकों ने बताया कि इस घटना से यूनिवर्सिटी कालेज आफ मेडिकल साइंसेज (यूसीएमएस) और जीटीबी अस्पताल के सीनियर व जूनियर रेजिडेंट्स में नाराजगी है।

By Jagran News Edited By: Geetarjun Wed, 10 Jul 2024 12:12 AM (IST)
GTB अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में रेजिडेंट डॉक्टरों पर हमले का आरोप

जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। दिलशाद गार्डन स्थित गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल के रेजिडेंट चिकित्सक एसोसिएशन (आरडीए) ने स्त्री रोग विभाग में भीड़ द्वारा रेजिडेंट चिकित्सकों पर हमले का आरोप लगाया है। आरडीए की ओर से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे के बाद हथियारों से लैस 50 से 70 लोगों की भीड़ ने स्त्री रोग विभाग में धावा बोल दिया।

कर्मचारियों को धमकाने के साथ-साथ वहां तोड़फोड़ भी की। चिकित्सकों ने बताया कि इस घटना से यूनिवर्सिटी कॉलेज आफ मेडिकल साइंसेज (यूसीएमएस) और जीटीबी अस्पताल के सीनियर व जूनियर रेजिडेंट्स में नाराजगी है। घटना से नाराज रेजिडेंट चिकित्सक दोपहर 12 बजे के बाद हड़ताल पर चले गए। वे संस्थागत प्राथमिकी करने की मांग पूरी होन तक हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान केवल आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी।

आरडीए के अध्यक्ष डा. नितेश कुमार ने बताया कि सुबह करीब साढ़े पांच बजे पुरानी बिल्डिंग में तीसरे तल पर स्त्री रोग विभाग के क्लियर लेबर रूम (सीएलआर) में भीड़ ने चिकित्सकों को धमकी दी। साथ ही वहां पर तोड़फोड़ भी की। रेजिडेंट चिकित्सकों का कहना है कि अस्पताल में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाए। साथ ही हाटस्पाट क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। आरडीए के मीडिया प्रतिनिधि डा. रजत ने बताया कि चिकित्सकों ने काम बंद करके चिकित्सा निदेशक के कमरे में जाकर संस्थागत प्राथमिकी करने की मांग की है। प्राथमिकी करने और सुरक्षा बढ़ाने की मांग पूरी होने के बाद वे हड़ताल खत्म कर देंगे अन्यथा हड़ताल जारी रहेगी।

प्रसव के बाद मां की मौत, स्वजन ने लगाए चिकित्सकों पर आरोप

मंडोली गांव निवासी उस्मान ने बताया कि उनके सबसे छोटे भाई जुबैर की पत्नी हिना को सात जुलाई की देर शाम वे जीटीबी अस्पताल लाए थे। मंगलवार सुबह तीन बजकर 38 मिनट पर हिना ने बच्ची को जन्म दिया। पिछले साल शादी हुई थी। यह उनका पहला बच्चा था। जन्म के ढाई घंटे बाद तक चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ ने किसी भी स्वजन को उनसे मिलने नहीं दिया। बच्ची को नर्सरी में शिफ्ट कर दिया था। साढ़े पांच के करीब जब अंदर मिलने गए तो हिना की मौत हो चकी थी। मौत की खबर सुनकर हम लोगों ने चिकित्सकों के साथ बहस तो की थी, लेकिन किसी तरह की मारपीट या तोड़फोड़ नहीं की है। देर शाम वे बच्ची को नर्सरी से घर ले गए।

इस संबंध में अस्पताल प्रशासन की मीडिया प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा का कहना है कि महिला की मौत पोस्टमॉर्टम हेमरेज (पीपीएच) के कारण हुई थी। यह एक ऐसी स्थिति हो जिसमें महिलाओं को प्रसव के बाद बहुत अधिक ब्लीडिंग होती है। चिकित्सकों ने काफी प्रयास किया था कि महिला की जान बच सके। पैदा हुई बच्ची खतरे से बाहर है। आरडीए की मांग पर जीटीबी एन्क्लेव थाने में प्राथमिकी करने के लिए पत्र भेज दिया है। साथ ही अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत भी की जाएगी।