नई दिल्ली (जेएनएन)। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली द्वारा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व अन्य आप नेताओं पर दायर 10 करोड़ के सिविल मानहानि मामले में बुधवार को हाई कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों में करीब एक घंटे तक तीखी नोक-झोंक हुई। मुख्यमंत्री की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी के जेटली को शातिर (क्रूक) कहने पर कोर्ट रूम में जमकर हंगामा हुआ।

कई बार संयुक्त रजिस्ट्रार को दोनों पक्षों को वकीलों को शांत करवाना पड़ा। यहां तक कि रजिस्ट्रार ने वयोवृद्ध अधिवक्ता को भी बहस में सही शब्दों का चयन करने की ताकीद की और यहां तक कह दिया कि वह ऑर्डर में उनके कहे शब्दों का उल्लेख कर रहीं हैं। जेठमलानी चाहें तो इसे चुनौती दे सकते हैं।

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दोपहर करीब 2 बजे संयुक्त रजिस्ट्रार दीपाली शर्मा के समक्ष मामले की सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई शुरू होते ही जेठमलानी ने जेटली से कहा आपके खिलाफ एक लेख इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ। क्या आपने इसे पढ़ा। जेठमलानी ने जेटली पर आरोप लगाया कि आपने उक्त लेख संडे गार्जियन में प्रकाशित होने से रोका।

आपका इस पर क्या कहना है। इस पर जेटली की तरफ से अधिवक्ता राजीव नायर व संदीप सेठी ने इस प्रश्न पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसका केस से कोई लेना-देना नहीं। जेठमलानी ने वकीलों से कहा कि केस से मतलब है जेटली की कोई प्रतिष्ठा नहीं, वह साबित करेंगे।

जेटली के वकीलों ने इस पर कड़ा विरोध जताया और चेतावनी दी कि वह उनका अनादर न करें। जेठमलानी ने कई बार यह प्रश्न पूछा और बार-बार जेटली के वकीलों ने इसका विरोध किया। जेटली ने जवाब दिया कि मैं कुछ प्रमुख समाचार पत्रों को पढ़ता हूं। बड़ी संख्या में अखबारों में मेरे खिलाफ छपता है, यह जरूरी नहीं कि वह मेरी जानकारी में हो।

सुनवाई के दौरान एक बार ऐसा मौका आया जब जेठमलानी ने कहा कि जेटली बड़े शातिर (क्रूक ) हैं। इस पर अरुण जेटली ने कहा, क्या ये शब्द प्रयोग करने के लिए मुख्यमंत्री ने आपको अनुमति दी है। अगर हां तो मैं 10 करोड़ की मानहानि की राशि को बढ़ाने वाला हूं। अरुण जेटली ने कहा कि अपमान की एक सीमा होती है।

जेठमलानी अपनी खुद की दुश्मनी निकाल रहे हैं। अरुण जेटली ने कहा कि आप निजी जिन्दगी को लेकर हमले कर रहे हैं ये ठीक नहीं। जेठमलानी निजी स्वार्थ के चलते यह सब कर रहे हैं उन्हें केस से अपना नाम वकील के रूप से वापस लेना चाहिए।

जेटली के वकीलों ने कहा कि केस के हिसाब से यह प्रासंगिक नहीं। उनका कहना था कि केस जेटली व मुख्यमंत्री के खिलाफ है भाजपा, या फिर जेठमलानी व जेटली के खिलाफ नहीं।

इसके बाद जेठमलानी ने माना कि वह यह सब अपने मुवक्किल (मुख्यमंत्री) की हिदायत पर ही बोल रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री की तरफ से पेश एक अन्य वकील ने इस पर अनभिज्ञता जताई। फिर जेठमलानी ने कहा कि मैं अपने मुवक्किल से अपनी मर्जी से मिल रहा हूं। मैं उनसे केस समझने के लिए मिलता हूं।

जेठमलानी ने कोर्ट में ये भी कहा कि काला धन लाने में मैंने जितनी लड़ाई लड़ी अरुण जेटली ने उस पर पानी फेर दिया। मैं इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक गया। भाजपा ने काला धन विदेशों से वापस लाने के नाम पर चुनाव जीता, लेकिन किया कुछ नहीं।

इस पर जेटली के वकीलों ने कहा कि यह सब तर्क बेतुके व अपमानजनक हैं। वहीं, कोर्ट ने समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों व भाजपा संबंधी बातों पर कहा कि यह इस केस से संबंधित नहीं है।

गत 15 मई को भी यह सवाल खारिज कर दिए गए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री की तरफ से मौजूद एक अन्य अधिवक्ता ने मामले की सुनवाई किसी दूसरे दिन करने का आग्रह किया।

फिर कोर्ट ने सुनवाई के लिए 28 व 31 जुलाई की तारीख तय कर दी। इस बीच दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल राहुल मेहरा ने जेटली के वकीलों पर जेठमलानी को घेरने का आरोप लगाया। जिस पर जेटली के वकीलों ने कड़ी आपत्ति जाहिर की।

पेश मामले में जेटली ने मुख्यमंत्री के अलावा आप नेता राहुल चढ्डा, संजय सिंह, आशुतोष, कुमार विश्वास, और दीपक वाजपेयी समेत छह लोगों के खिलाफ यह मामला दायर किया है।

आरोप है कि इन सभी ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) विवाद में उन्हें बदनाम किया है। उनके खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी की है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

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