नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। मनी लांड्रिंग रोकथाम अधिनियम के प्रविधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली अपनी याचिका को जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने वापस ले लिया है। मुफ्ती ने मनी लांड्रिंग के प्रविधानों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को देखते हुए उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका वापस ली है।

क्या कहता है धन शोधन निवारण अधिनियम ?

बता दें कि जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने धारा 50 के संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (Prevention of money laundering act 2002) के प्रावधान को भी कोर्ट में चुनौती दी थी। PMLA की यह धारा 50 ED को किसी भी व्यक्ति को सबूत देने के लिए बुलाने का स्वतंत्र अधिकार देती है। बता दें कि किसी भी मामले में समन किए गए व्यक्तियों को ED द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देना पड़ता हैं। अगर समन किए गए व्यक्ति ने ऐसा नहीं किया तो वह पीएमएलए के तहत दंडित हो सकता है। 

विपक्षी नेता लंबे समय से उठा रहे आवाज

बता दें कि विपक्षी नेता लंबे समय से आवाज उठा रहे है कि केंद्र सरकार ED का गलत इस्तेमाल कर रही है। ED की गाज कई विपक्षी नेताओं पर गिरी है, जिसमें सोनिया गांधी के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और तृणमूल कांग्रेस के पार्थ चटर्जी तक शामिल हैं। इसीके चलते विपक्षी नेताओं की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में यह याचिका लगाई गई थी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पर सुनवाई की थी, जिसमें PMLA के विभिन्न प्रावधानों की वैधता को बरकरार रखाने का फैसला सुनाया गया था। 

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Edited By: Abhi Malviya

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