नई दिल्ली, विनीत त्रिपाठी। ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी की समस्या को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह ब्लड बैंक की तर्ज पर सिलेंडर बैंक बनाए। न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि उम्मीद है कि लोग वहां जाएं और सिलेंडर सौंप दें। पीठ ने कहा कि स्थितियों में सुधार होने पर उन्हें यह वापस दे दिया जाएगा। पीठ ने कहा यह उनकी संपत्ति है। इतना ही नहीं खाली सिलेंडर लेकर आने वाले को दिल्ली सरकार भरा ऑक्सीजन सिलेंडर देने की व्यवस्था करे।

पीठ ने कहा किस इससे ऑक्सीजन की कालाबाजारी भी कम होगी और जमाखोरी भी नहीं होगी। पीठ ने यह सुझाव तब दिया जब अदालत मित्र व वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने कहा कि घरों में जमा करके रखा गया हर सिलेंडर लोगों को मार रहा है। उन्होंने कहा कि सिलेंडर बैंक की सुरक्षा में सेना या पैरा मिलिट्री को लगाया जा सकता है। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि हम हर जिले में एक कैंप बना सकते हैं। वहां पर लोग खाली सिलेंडर लेकर आ सकते हैं और भरा ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि यह तभी संभव होगा जब हमें आवंटित आक्सीजन की आपूर्ति हो। इस पर पीठ ने कहा कि इसे लेकर पूरी कार्ययोजना तैयार कर लें, ताकि हम इसे आपूर्ति की व्यवस्था होने के साथ ही शुरू कर सकें।

ऑक्सीजन इस्तेमाल पर रिपोर्ट दे आइसीएमआर

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऑक्सीजन के इस्तेमाल को लेकर लोगों में जानकारी का अभाव है। पीठ ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) इस बाबत एक दिशानिर्देश तैयार करके जारी करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि ऑक्सीजन के इस्तेमाल का उपयाेग करने की जानकारी अहम सवाल है। लोग इसे बंद कमरे में इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके कई पहलू है। पीठ ने कहा कि दिशानिर्देश को जारी करने के साथ ही इसे राष्ट्रीय मीडिया के माध्यम से प्रचारित भी करें।

राजनेताओं द्वारा दवाओं को हासिल व वितरित करने के मामले को देखे पुलिस

राजनेताओं द्वारा कथित तौर पर कोरोना मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं व रेमडेसिविर जैसे इंजेक्शन को खरीदने व वितरण करने के मामले का पीठ ने पुलिस को परीक्षण करने को कहा है। पीठ ने दिल्ली पुलिस को एक सप्ताह के अंदर स्थिति रिपोर्ट पेश करने को भी कहा। हांलाकि, पीठ ने मामले की सीबीआइ जांच के आदेश से इन्कार कर दिया। मामले में अगली सुनवाई 17 मई को होगी। राष्ट्रीय निशानेबाज व याचिकाकर्ता दीपक सिंह ने अधिवक्ता विराग गुप्ता के माध्यम से याचिका दायर कर सवाल उठाया कि जब आम जनता को ये दवा और इंजेक्शन नहीं मिल रहा है तो फिर नेताओं को कैसे मिल रहा है और वे इसे स्टाक कैसे कर सकते हैं।