नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। दिल्ली में इस माह की शुरुआत में ओमिक्रोन के कारण ही कोरोना का संक्रमण बढ़ा और डेल्टा वायरस पर पूरी तरह हावी हो गया। इसलिए अब दिल्ली में करीब सौ प्रतिशत मामले ओमिक्रोन के ही आ रहे हैं। खास बात यह है कि दिल्ली में ओमिक्रोन संक्रमण के ज्यादातर नए मामले बीए.2 सब-स्ट्रेन के आ रहे हैं। जीनोम सिक्वेंसिंग में यह बात सामने आई है कि जनवरी माह में कोरोना से मरने वाले मरीज भी ओमिक्रोन के बीए.2 सब- स्ट्रेन से ही संक्रमित थे।

उल्लेखनीय है कि जनवरी में कोरोना के तीन लाख 55 हजार से अधिक मामले आ चुके हैं। वहीं इस माह अब तक 573 मरीजों की मौत हुई है। इस माह मौत के बढ़ते मामलों के मद्देनजर दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने मृतकों के सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग करने का निर्देश दिया था, ताकि यह पता चल सके कि मृतकों में संक्रमण का कारण डेल्टा था या ओमिक्रोन। इसके तहत लोकनायक व यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान (आइएलबीएस) में कुछ मृतकों के सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग की गई है। जिसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड को भेज दी गई है, जो मृतकों के मौत के कारणों की समीक्षा करती है।

सूत्रों के अनुसार आइएलबीएस में सात मृतकों के सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग की गई है, जिसमें पता चला है कि सभी मृतकों को ओमिक्रोन के बीए.2 सब-स्ट्रेन का संक्रमण था। दिल्ली में पांच दिसंबर को ओमिक्रोन का पहला मामला सामने आया था। इसके बाद दिल्ली में 23 दिसंबर तक करीब 34 प्रतिशत सैंपल में ओमिक्रोन व करीब 66 प्रतिशत सैंपल में डेल्टा का संक्रमण पाया गया था। दिसंबर के अंत तक ओमिक्रोन का संक्रमण 54 प्रतिशत तक पहुंच गया था। आइएलबीएस के एक वरिष्ठ डाक्टर ने कहा कि दिसंबर में ओमिक्रोन से संक्रमित मरीजों में बीए.1 सब-स्ट्रेन पाया जा रहा था, इसकी जगह जनवरी में ओमिक्रोन के बीए.2 सब-स्ट्रेन ने ले ली है और डेल्टा का संक्रमण करीब-करीब खत्म हो चुका है।

बीए.2 सब स्ट्रेन नहीं है ज्यादा घातक

डाक्टर कहते हैं कि ओमिक्रोन के बीए.1 सब स्ट्रेन की तुलना में बीए.2 सब-स्ट्रेन ज्यादा घातक नहीं है। दोनों स्वरूप में मामूली अंतर है। एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डा. संजय राय ने कहा कि ओमिक्रोन के सिर्फ ये दो ही सब-स्ट्रेन नहीं है, बल्कि कई सब-स्ट्रेन हैं। ओमिक्रोन का संक्रमण शुरू होने के कुछ दिन बाद ही बीए.2 स्ट्रेन की भी पहचान हो गई थी। यह दोनों सब-स्ट्रेन एक जैसे ही बहुत संक्रामक हैं लेकिन बीमारी गंभीरता में फर्क नहीं है।

दूसरी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की मौतें अधिक

पिछले दिनों कोरोना से मरने वाले मरीजों की मौत के मामलों की समीक्षा में यह बात साबित हो चुकी है कि इस बार कोरोना से मृत करीब 74 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जो पहले से दूसरी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। सिर्फ कोरोना के कारण मरने वाले मरीजों की संख्या बहुत कम रही है।

Edited By: Prateek Kumar