नई दिल्ली [राहुल सिंह]। नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) इलाके में लगातार हरियाली कम हो रही है। इसको लेकर अधिकारी अब चिंतित है। जल्द ही एक सर्वे शुरू कर पेड़ों के कम होने का पता लगाया जाएगा कि आखिर लुटियंस दिल्ली में क्यों पेड़ों की संख्या कम हो रही है। साथ ही विरासत वाले 300 पेड़ भी कम हुए हैं, जिसके बारे के कारणों का अध्ययन भी एनडीएमसी करेगी। अधिकारियों के मुताबिक पिछले छह वर्षों में लगभग 300 विरासत पेड़ों सहित कुल 1,813 पेड़ों की संख्या कम हुई है। इसके कारण राष्ट्रीय राजधानी के इस इलाके की हरियाली अब कम हो रही है।

अधिकारियों ने शुरूआती जांच में पाया है कि कंक्रीट के जंगल बढ़ने, बार-बार सड़क काटने, दीमक और मिट्टी के प्रकार (रेतीली बजरी मिट्टी) के कारण पेड़ उखाड़ रहे हैं। एनडीएमसी क्षेत्र केंद्रीय मंत्री और सांसदों के अलावा कई शीर्ष उद्योगपतियों के घर हैं, जहां वह रहते हैं। इसके अलावा मंत्रालयों के भवन, संसद भवन, सर्वोच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के आवास भी बने हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार, लुटियंस की दिल्ली में प्रति वर्ष 250 से अधिक पेड़ गिर रहे हैं। 2015 से इस क्षेत्र ने अब तक 1,813 पेड़ खो दिए हैं।

एनडीएमसी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2021-22 के बीच 1,813 पेड़ों में से लगभग 300 विरासत पेड़ भी नष्ट हो गए हैं।इनमें 60 से अधिक नीम के पेड़ के साथ गुलमोहर, पीपल व पिलखन समेत अन्य प्रकार के पेड़ हैं। एनडीएमसी ने जाकिर हुसैन रोड स्थित संरक्षित पिलखन, अब्दुल कलाम रोड व पृथ्वीराज रोड स्थित नीम का पेड़ समेत अन्य मार्गों पर स्थित कई विरासती पेड़ को इन वर्षों में खोया है।

अधिकारियों को चिंता है कि एनडीएमसी क्षेत्र में प्रति वर्ष लगभग 250 पेड़ कम हो रहे हैं। जो एक बड़ी संख्या है। एनडीएमसी जल्द ही पेड़ों के इतनी तेजी से गिरने के पीछे सटीक वजह का पता लगाने के लिए गिरे और मृत पेड़ों की जांच करने के लिए अभ्यास शुरू करेगी। ताकि बाकि पेड़ों को बचाते हुए हरियाली को बढ़ाया जा सकें।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari