नई दिल्ली [जेएनएन]। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत दिल्ली सरकार के डिस्पेंसरियों व डॉट्स केंद्रों में अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। वे समान पद, समान वेतन और कर्मचारियों को स्थायी किए जाने की मांग कर रहे हैं।

इस हड़ताल से डिस्पेंसरियों में चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित हो गईं। इस वजह से मरीजों को परेशान होना पड़ा। कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली सचिवालय के बाहर प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। 

दिल्ली राज्य स्वास्थ्य मिशन द्वारा संचालित 14 स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कर्मचारियों के संयुक्त संगठन के नेतृत्व में कर्मचारियों ने यह हड़ताल की है। मौजूदा समय में करीब तीन हजार कर्मचारी विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों में अनुबंध पर नियुक्त हैं। इसमें से करीब 500 डॉक्टर, नर्सिंग कर्मचारी व तकनीशियन शामिल हैं।

हड़ताल से डॉट्स सेंटरों में चिकित्सा सुविधा प्रभावित होने से टीबी के मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई है। यदि हड़ताल एक-दो दिन में नहीं खत्म हुई तो बच्चों को टीकाकरण भी प्रभावित होगा। आम तौर पर डिस्पेंसरियों में हर सप्ताह बुधवार व शुक्रवार को बच्चों को टीके लगाए जाते हैं। ऐसी सूरत में बुधवार व शुक्रवार तक हड़ताल रहने पर हजारों बच्चे टीकाकरण से महरूम हो सकते हैं।

टीबी एंप्लॉई वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव कुलदीप कोहली ने कहा कि अनुबंधित कर्मचारियों से स्थायी कर्मचारियों से अधिक काम लिया जाता है। फिर भी स्थायी व अनुबंधित कर्मचारियों के वेतन में काफी अंतर है। इस असमानता को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने समान पद, समान वेतन लागू करने का निर्देश दिया था। इस मांग को लेकर कर्मचारियों ने मार्च में भी प्रदर्शन किया था। तब दिल्ली सकरार ने 31 मार्च तक मांगे पूरी करने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद अब तक मांगे पूरी नहीं की गई। उधर आशा वर्कर भी अपनी वेतन संबंधी मांगों को लेकर करीब तीन सप्ताह से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। 

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Edited By: Amit Mishra