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समग्र विकास के लक्ष्य की राह में कई बार लेने पड़ते हैं कड़े निर्णय- केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के समग्र विकास के लक्ष्य पर कार्य कर रहे हैं। देश का गरीब से गरीब नागरिक छोटे से छोटा किसान महिलाएं सभी के जीवन में व्यापक बदलाव आए।

By Gautam Kumar MishraEdited By: Abhishek TiwariTue, 21 Mar 2023 02:53 PM (IST)
समग्र विकास के लक्ष्य की राह में कई बार लेने पड़ते हैं कड़े निर्णय- केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के समग्र विकास के लक्ष्य पर कार्य कर रहे हैं। देश का गरीब से गरीब नागरिक, छोटे से छोटा किसान, महिलाएं सभी के जीवन में व्यापक बदलाव आए, इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कई सुधारात्मक कार्य किए जा रहे हैं।

इस लक्ष्य की प्राप्ति में कई बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कड़े निर्णय भी लेते हैं। हम सभी जानते हैं कि मलेरिया के उपचार में कुनैन की जरूरत पड़ती है। प्रधानमंत्री ने एक ओर देश की बैकिंग प्रणाली से एक वर्ष में 48 करोड़ लोगों को जोड़ा तो दूसरी ओर नोटबंदी भी की। यदि यह नहीं होती तो देश डिजिटिलाइजेशन, कैशलेस प्रणाली का महत्व नहीं समझ पाता।

केंद्रीय कृषि मंत्री पूसा में मिश्रित शिक्षा प्रणाली के कृषि शिक्षा में उपयोग विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्ररीय सेमिनार के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। संबोधन भाषण में इन्होंने कहा कि आज देश डिजिटिलाइजेशन में काफी तरक्की कर चुका है। देश में 11.5 करोड़ किसानों के खाते में किसान सम्मान निधि राशि सीधे डाली जा रही है। दुनिया में कई देशों की इतनी आबादी भी नहीं है। दुनिया के विकसित देश भी डिजिटिलाइजेशन के मामले में हमसे आगे नहीं हैं।

केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले फसल बीमा का किसानों को नाममात्र लाभ मिलता था, कुछ ही किसान इसका लाभ उठा पाते थे। आज 1.30 लाख करोड़ रुपये की बीमा राशि के भुगतान के प्रयास में सरकार जुटी है। करीब 20 लाख करोड़ रुपये के अल्पकालिक ऋण किसानों को दिए जा रहे हैं ताकि वे साहूकार पर निर्भर नहीं रहें।