नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। भाजपा ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए लोगों को अस्पताल में भर्ती होने के बजाय होम आइसोलेशन में रखा जिससे यहां संक्रमण बढ़ा। समय पर इलाज नहीं मिलने से हजारों लोगों की जान चली गई। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि राजधानी में लगभग 70 फीसद मकान 100 गज या इससे भी छोटे भी छोटे हैं। अधिकांश मकान में एक ही शौचालय व स्नानघर है, इसलिए किसी कोरोना संक्रमित का घर में रहने से परिवार के अन्य सदस्य भी संक्रमित हुए। इस तरह से संक्रमण फैलता चला गया। यदि संक्रमित व्यक्ति की शुरू में पहचान करके उसे अस्पताल या कोरोना केयर सेंटर में भर्ती किया जाता तो इतनी संख्या में लोगों की मौत नहीं होती।

सरकार पर लगा लापरवाह होने का आरोप

प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा विश्व में प्रति दस लाख की जनसंख्या पर मरने वालों की संख्या 455 है। भारत में 234 लोगों की मौत हुई है। वहीं, 30 मई तक के आंकड़ों को देखें, तो दिल्ली में 1207 लोगों की जान गई है। दिल्ली के लोगों के लिए खरीदे गए आक्सीमीटर व अन्य उपकरणों का दूसरे राज्यों में राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया।

आइसोलेशन सेंटर बनाने व आक्सीमीटर खरीद में गड़बड़ी, जांच होनी चाहिए- रामवीर बिधूड़ी

वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि सरकार की अदूरदर्शिता की वजह से पहली लहर के दौरान बनाए गए अस्थायी कोरोना केयर सेंटर तोड़ दिए गए थे। दूसरी लहर आने पर इन्हें बनाने का फिर से दिखावा किया गया। कोरोना केयर सेंटर में न तो डाॅक्टर थे और न ही जरूरी उपकरण। उन्होंने कहा कि होम आइसोलेशन सेंटर बनाने, आक्सीमीटर और अन्य जरूरी चिकित्सा उपकरणों के खरीद में, कंटनमेंट जोन बनाने में और सिविल डिफेंस भर्ती में गड़बड़ी हुई है। इसकी जांच होनी चाहिए। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि मोहल्ला क्लीनिक में कोरोना केयर सेंटर और टीकाकरण केंद्र क्यों नहीं बनाए गए।

मुआवजा देने के डर से कोरोना संक्रमण से मरने वालों के आंकड़े छिपा रही सरकारः रमेश बिधूड़ी

इधर, दक्षिणी दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी ने कहा कि नीति आयोग ने पिछले वर्ष 10 अक्टूबर को ही रिपोर्ट दी थी कि अरविंद केजरीवाल सरकार की होम आइसोलेशन व्यवस्था प्रभावी नहीं है। उन्होंने कहा कि राजधानी में कोरोना से मरने वालों में 44 फीसद मरीज ऐसे थे जिन्हें होम आइसोलेशन में रखा गया था। सरकार कोरोना की जांच व कोरोना से मरने वालों के आंकड़ें छिपा रही है। सरकार के अनुसार अप्रैल व मई में कुल 13201 लोगों की मौत हुई जबकि नगर निगम के अनुसार यह संख्या 34750 है। मुआवजा न देना पड़े इसलिए मृतकों की सही संख्या नहीं बताई जा रही है।

Edited By: Prateek Kumar