नई दिल्ली, जेएनएन। दिवाली के बाद से गंभीर श्रेणी में पहुंचा वायु प्रदूषण का स्तर फिर कहर बरपाने लगा है।हवा की धीमी गति के चलते और विपरीत मौसमी हालात से शुक्रवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब की श्रेणी में बनी है, जबकि सात क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता 'गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि अगले तीन दिन तक ऐसे ही हालात बने रहेंगे। एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक, दिल्ली के लोधी रोड इलाके में पीएम 2.5 251 तो पीएम 10 का स्तर 255 रहा तो बृहस्पतिवार से अधिक होने के साथ बेहद खराब श्रेणी में पहुंच गया है। 

इससे पगले मौसमी उतार-चढ़ाव के बीच बृहस्पतिवार को भी प्रदूषण का स्तर बेहद खराब श्रेणी में ही बना रहा और एयर इंडेक्स भी 300 से ऊपर रिकॉर्ड किया गया। अभी अगले तीन दिनों में भी प्रदूषण की कमोबेश ऐसी ही स्थिति बने रहने के आसार हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार इसकी मौसमी परिस्थितियां हैं।

सीपीसीबी के मुताबिक अभी सर्दियां चल रही हैं, हवा में भी नमी है। हैरत की बात यह कि खुले में कचरा अब भी जल रहा है। दूसरी तरफ तापमान गिर रहा है। इन्हीं सब कारणों से प्रदूषण इस स्थिति में बना हुआ है।

मुंडका में प्रदूषण की गंभीर स्थिति होने के बाद उत्तरी दिल्ली नगर निगम की टीम जांच करेगी। इसके लिए शुक्रवार को निगम की टीम नांगलोई, मुंडका और टीकरी इलाके का निरीक्षण करेगी। उत्तरी दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में अतिरिक्त आयुक्त बीएम मिश्र ने यह जानकारी दी। मिश्र ने बताया कि इसके बाद ही प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर सीलिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

स्थायी समिति की बैठक में कांग्रेस पार्षद मुकेश गोयल ने आरोप लगाया था कि बाहरी दिल्ली के नांगलोई, मुंडका व टीकरी में चल रही प्रदूषित औद्योगिक इकाईयों को सील करने की कार्रवाई निगम की ओर से शुक्रवार को की जानी संभावित है। इस संबंध में निगम आयुक्त की ओर से एक सर्कुलर भी जारी किया गया है। लेकिन, इस कार्रवाई के लिए संबंधित औद्योगिक इकाईयों को निगम की ओर से कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि सीलिंग कार्रवाई से पहले संबंधित इकाई को 48 घंटे पहले नोटिस जारी किया जाए।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि दुरुपयोग करने वालों को तो 48 घंटे की छूट मिलेगी। इस दौरान वह अपना लाइसेंस दिखा सकते हैं या फिर यह हलफनामा दे सकते हैं कि वह इस तरह का दुरुपयोग नहीं करेंगे। निगमायुक्त मधुप व्यास ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य प्रकार की सीलिंग पर राहत देने के लिए पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) की बैठक में पार्षदों की राय रखी जाएगी।

पहले जुर्माना भरें, सुनवाई बाद में होगी

नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई करने से इनकार कर दिया। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण की समस्या पर रोक लगाने में विफल रहने पर एनजीटी ने तीन दिसंबर को दिल्ली सरकार को 25 करोड़ रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश दिया था।

प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने दिल्ली सरकार की अपील ठुकराते हुए कहा, ‘भूल जाइए (तत्काल सुनवाई)। AAP (दिल्ली सरकार) इसे (जुर्माना) जमा कराइए।’ बता दें कि एनजीटी ने जुर्माना लगाते हुए कहा था, साढ़े चार साल बाद भी पीड़ित पक्ष की शिकायत यही है कि प्लास्टिक के अनियंत्रित निपटान के कारण उत्पन्न होने वाला प्रदूषण बदस्तूर जारी है। टिब्यूनल मुंदका निवासी सतीश कुमार और तिकरी कलां निवासी महावीर सिंह की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।

Posted By: JP Yadav