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Delhi: भूमाफियाओं ने किया मॉरिशस हाई कमीशन की जमीन हथियाने का षड्यंत्र, इस तरह खुली पोल

भूमाफियाओं ने फर्जीवाड़ा कर लुटियन्स दिल्ली में स्थित मॉरिशस उच्चायोग (Mauritius High Commission) की जमीन हथियाने का षड़यंत्र रचा लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों की सतर्कता ने इसे नाकाम कर दिया। चाणक्यपुरी स्थित इस जमीन को कब्जाने के लिए भूमाफियाओं ने आवासन व शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) से एक फर्जी कन्वेंस डीड का उपयोग किया।

By ajay rai Edited By: Geetarjun Published: Mon, 10 Jun 2024 11:17 PM (IST)Updated: Mon, 10 Jun 2024 11:17 PM (IST)
भूमाफियाओं ने किया मॉरिशस हाई कमीशन की जमीन हथियाने का षड्यंत्र।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भूमाफियाओं ने फर्जीवाड़ा कर लुटियन्स दिल्ली में स्थित मॉरिशस उच्चायोग (Mauritius High Commission) की जमीन हथियाने का षड़यंत्र रचा, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों की सतर्कता ने इसे नाकाम कर दिया। चाणक्यपुरी स्थित इस जमीन को कब्जाने के लिए भूमाफियाओं ने आवासन व शहरी कार्य मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) से एक फर्जी कन्वेंस डीड का उपयोग किया।

लेकिन, जमीन रजिस्ट्री कराने संबंधी दस्तावेज पर कई विसंगतियां थीं, जिस पर उप रजिस्ट्रार ने जानकारी मांगी तो उनका बयान बार-बार बदलने लगा। इससे आशंका हुई और जांच आगे बढ़ी तो सब कुछ फर्जी साबित हुआ।

दो मई को जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचा

नई दिल्ली राजस्व विभाग के अनुसार, मॉरिशस उच्चायोग को आवंटित 1,354.16 वर्ग गज जमीन चाणक्यपुरी में कौटिल्य मार्ग पर प्लॉट नंबर पांच, ब्लाक नंबर 39 में है। बीते दो मई को जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचा तिलक सिंह नाम का व्यक्ति दस्तावेज में विसंगतियों के साथ अपनी उम्र भी ठीक से नहीं बता पा रहा था।

लगाया अंगूठा, कीमत में भी झोल

अधिकारियों के अनुसार, वह अपनी उम्र कभी 75 तो कभी 85 बता रहा था। पॉश इलाके में जमीन खरीदने वाले के हस्ताक्षर के बजाय अंगूठा लगाया था। इसके साथ ही जमीन की कीमत कहीं 54 लाख तो कहीं 64 लाख लिखी थी। इससे उप रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों को फर्जीवाड़े की आशंका हुई। दस्तावेज में 29 अप्रैल को एलएंडडीओ की एक कन्वेंस डीड भी लगाई गई थी। लेकिन, इसमें भी विसंगति थी, इसे नियमानुसार कराने की बात कही।

माफियाओं ने फर्जी पत्र भी दिया

चूंकि आशंका गहरा गई थी तो राजस्व विभाग ने 17 मई को एलएंडडीओ को पत्र भेज कर इस संबंध में जानकारी मांग ली। इस बीच, भूमाफियाओं ने 29 मई को एलएंडडीओ से डिप्टी भूमि एवं विकास अधिकारी के हवाले से उप रजिस्ट्रार को जवाब भेज दिया, जिसमें पुष्टि की गई कि डीड सही है। लेकिन, इससे पहले उप रजिस्ट्रार को एलएंडडीओ से टेलीफोन कॉल आ चुकी थी कि लेटर फर्जी है, अभी हम जवाब भेज रहे हैं, तब तक इस जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया रोक दी जाए।

असल में डीड जारी होने के समय जिस अधिकारी के हस्ताक्षर थे, वह डिप्टी एलएंडडीओ के रूप में काम नहीं कर रहा था। अंतत: तीन जून को एलएंडडीओ का आधिकारिक पत्र आया, जिसमें बताया गया कि डीड से लेकर सत्यापन रिपोर्ट तक सब फर्जी है। इसके साथ ही विभाग ने पत्र लिखकर यह भी सूचित कर दिया है कि दिल्ली में कोई सब रजिस्ट्रार कार्यालय एलएंडडीओ की किसी भी जमीन को बिना उसके सत्यापन के रजिस्टर न करे।

ऐसे किया फर्जीवाड़े का प्रयास

भूमाफियाओं ने आवासन व शहरी कार्य मंत्रालय के एलएंडडीओ के पुराने लेटर हेड के ऊपर का हिस्सा उपयोग कर अलग प्रिंट निकाल लिया था। इसके साथ बाजार से विभाग का मोहर बनवाकर एलएंडडीओ में दो साल पहले रहे अधिकारी का फर्जी हस्ताक्षर कर दिया। लेकिन, जांच जैसे जैसे आगे बढ़ी पूरा फर्जीवाड़ा खुल गया।

अब उप रजिस्ट्रार कार्यालय ने मामले को राजस्व विभाग के पास भेज दिया है। इस जमीन की रजिस्ट्री के लिए कुल 3.85 लाख के स्टांप पेपर लगाए गए हैं और पंजीकरण शुल्क के तौर पर 54 हजार रुपये जमा किए गए हैं। अब राजस्व विभाग इस रकम को जब्त करने की कार्रवाई शुरू करेगा।


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