नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली में प्रदूषण रोकने के नाम पर दिल्ली सरकार ने आगामी एक अक्टूबर से 28 फरवरी 2023 तक दिल्ली में मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इसको लेकर दिल्ली के व्यापारियों में अपने व्यापार के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। कऩ्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस मुद्दे पर बुधवार को हिंदी भवन में बैठक कर तय किया कि अगर सरकार यह आदेश वापस नहीं लेगी तो इसका विरोध किया जाएगा। बैठक में दिल्ली के लगभग 200 से अधिक व्यापारिक संगठनों के नेता मौजूद थे। सभी ने कहा कि इससे दिल्ली के व्यापारियों को पड़ोसी राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में अपना व्यापार स्थानांतरित करना पड़ेगा।

इस मुद्दे पर कैट का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, उपराज्यपाल वीके सक्सेना, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलेगा और इस आदेश को वापस लिए जाने का आग्रह करेगा। वापस न लेने पर दिल्ली भर में एक आक्रामक अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए कैट के प्रदेश अध्यक्ष विपिन आहूजा के नेतृत्व में एक संघर्ष समिति का गठन किया जाएगा। फिर 10 जुलाई से दिल्ली के सभी बाजारों में व्यापारियों की सभाएं एवं रैलियां आयोजित कर दिल्ली सरकार से इस आदेश को वापस लेने की मांग की जाएगी।

प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि प्रदूषण एक बड़ी समस्या है और इसे रोकने के कदम जरूर उठाने चाहिए। लेकिन, दिल्ली को छोड़कर ऐसा आदेश देश के किसी भी राज्य में नहीं है। व्यापारियों के बीच हो रहे व्यापार में यदि दिल्ली के व्यापारी सामान नहीं उपलब्ध करा पाएंगे तो उनका ग्राहक किसी और राज्य के व्यापारियों से माल लेगा और एक बार का गया ग्राहक दोबारा वापस नहीं आता। इस तरह व्यापार दिल्ली में व्यापारियों को बड़ा नुकसान होगा। बैठक में पर्यावरण सुरक्षा के लिए व्यापारियों ने दिल्ली में एक करोड़ पेड़ लगाए जाने का प्रस्ताव भी स्वीकार किया, जिसके लिए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार एवं दिल्ली नगर निगम से सहयोग मांगा जाएगा।

आगामी रक्षा बंधन पर दिल्ली भर के व्यापारी संगठन वृक्ष मित्र योजना चलाएंगे और दिल्ली के सभी भागों में पेड़ों पर राखियां बांधकर पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लिया जाएगा। आल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन एवं दिल्ली ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के नेता भी बैठक में मौजूद रहे। इस मामले को लेकर चैंबर्स आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआइ) के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत से मिलकर इस आदेश को वापस लेने से संबंधित पत्र सौंपा।

गहलोत ने कहा कि ऐसा एक प्रस्ताव चर्चा में आया था, लेकिन इस तरह का कोई आधिकारिक लिखित आर्डर जारी नहीं हुआ है। सरकार कोई भी निर्णय लेने से पहले दिल्ली के व्यापारियों, फैक्ट्री मालिकों, ट्रांसपो‌र्ट्स के हितों का पूरी तरह से ध्यान रखेगी और उनसे चर्चा करके ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari