नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, राजघाट, इंडिया गेट, कनॉट प्लेस सहित कई ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण स्थलों वाला यह क्षेत्र अटल-आडवाणी और कृपलानी जैसे दिग्गजों की सियासी कर्मभूमि रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व पूर्व उपप्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने दो-दो बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है।

वहीं, पहले लोकसभा चुनाव (1952) में दो महिला नेताओं के बीच चुनावी भिड़ंत हुई थी, जिसमें यहां के लोगों ने क्रांतिकारी महिला नेता सुचेता कृपलानी (किसान मजदूर प्रजा पार्टी) को अपना प्रतिनिधि चुना था। उन्हें दो बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।

यह क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है, दस बार उसे यहां से जीत मिली है। वैसे, 2004 व 2009 में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन 2014 के चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले में मीनाक्षी लेखी ने आम आदमी पार्टी (AAP) के आशीष खेतान को पराजित कर फिर से भाजपा ध्वज फहरा दिया।

वहीं, इस चुनाव में लगातार दो बार सांसद चुने जाने वाले कांग्रेस नेता अजय माकन को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था। अब एक बार फिर से यहां त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार हैं। आप ने यहां से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। उसने कारोबारी नेता बृजेश गोयल को टिकट थमाया है, जबकि भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवारों का अभी मतदाताओं को इंतजार है।

सिने स्टार राजेश खन्ना ने दी थी आडवाणी को चुनौती
दसवीं लोकसभा चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता आडवाणी को चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने उस समय के मशहूर अभिनेता राजेश खन्ना को उनके सामने चुनावी दंगल में उतार दिया। कांग्रेस का यह दांव कामयाब रहा। भाजपा के दिग्गज नेता को कड़ी चुनौती मिली वह मात्र डेढ़ हजार मतों से चुनाव जीत सकें। उन्होंने गुजरात के गांधीनगर से भी चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने नई दिल्ली सीट से इस्तीफा दे दिया। उपचुनाव में खन्ना के स्टारडम का सामना करने के लिए भाजपा ने शत्रुघ्न सिन्हा को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन वह यह सीट नहीं बचा सके।

वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा दिलचस्प चुनाव नई दिल्ली सीट पर हुआ था, जब लाल कृष्ण आडवाणी फिल्म स्टार राजेश खन्ना से चुनाव हारते हारते बचे थे। लालकृष्ण आडवाणी यह चुनाव महज डेढ़ हजार मतों से जीत सके थे। वह भी दोबारा मतगणना के बाद। 

 2008 में परिसीमन के बाद अब इसमें ये दस विधानसभा क्षेत्र आते हैं 

  • करोलबाग
  • पटेल नगर
  • मोती नगर
  • दिल्ली कैंट
  • राजेंद्र नगर
  • नई दिल्ली
  • कस्तूरबा नगर
  • मालवीय नगर
  • आरके पुरम
  • ग्रेटर कैलाश

 

Posted By: JP Yadav

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