गुरुग्राम [आदित्य राज]। कानून की सख्ती के बाद भी बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं। हर महीने औसतन दस से अधिक नाबालिग के साथ दुष्कर्म या छेड़खानी की शिकायतें सामने आ रही हैं। ये मामले वो हैं जो थानों में दर्ज होते हैं। कई शिकायतें सीधे बाल कल्याण समिति के पास भी पहुंचती हैं। काफी शिकायतें सामने आती भी नहीं हैं। केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार पॉक्सो एक्ट के तहत तत्काल कार्रवाई के ऊपर जोर दे रही है। इसके बाद भी अधिक असर नहीं दिख रहा है।

कई मामलों में पड़ोसी ही होते हैं आरोपी 

तीन साल तक की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के प्रयास के मामले सामने आ रहे हैं। अधिकतर मामलों में पड़ोसी ही आरोपी के रूप में सामने आ रहे हैं। इस वजह से काफी मामले सामने नहीं आ पाते हैं। लोकलाज इसके पीछे बहुत बड़ा कारण है। हालांकि इसके लिए लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। फिर बहुत ही कम लोग सामने आते हैं।

समाज की सोच बेहतर नहीं है

एक पीड़ित परिवार के सदस्य ने बताया कि यह ठीक है कि शासन-प्रशासन जागरूक कर रहा है लेकिन समाज की सोच बेहतर नहीं है। जिस बच्ची के साथ गलत होता है उसका जीना मुश्किल हो जाता है। आसपास के लोग उसके बारे में चर्चा शुरू कर देते हैं। जिस परिवार से नहीं बनती है उस परिवार के लोग शादी में भी अड़चन पैदा करा देते हैं। जहां बातचीत चलती है वहां किसी न किसी माध्यम से जानकारी देते हैं। ऐसी स्थिति में कैसे कोई परिवार सामने आएगा। जब तक समाज की सोच नहीं बदलेगी, जब तक इस तरह के मामले को लोग स्वयं से जोड़कर नहीं देखेंगे तब तक अधिकतर पीड़ित एवं उसके परिजन घुटते रहेंगे।

क्या है पॉक्सो एक्ट

बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट बनाया गया है। इसके तहत दुष्कर्म या कुकर्म साबित होने पर आरोपी को सात साल की सजा से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। अब फांसी की सजा भी देने की बात चल रही है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले इस कानून के दायरे में आते हैं।

पिछले सात महीने के दौरान दर्ज मामले

जनवरी : 12

फरवरी : 8

मार्च : 8

अप्रैल : 11

मई : 14

जून : 12

जुलाई : 17

समाज को आगे आना होगा

गुरुग्राम बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन शकुंतला ढुल का कहना है कि बाल कल्याण समिति के पास हर महीने 25 से अधिक शिकायतें आती हैं। कई पीड़ित काउंसिलिंग के बाद मेडिकल कराने को तैयार हो जाते हैं, कुछ तैयार नहीं होते हैं। यह सही है कि पॉक्सो एक्ट को लेकर सख्ती के बाद भी मामले बढ़ रहे हैं। इसके लिए समाज को आगे आना होगा। बच्चियों की सुरक्षित करने के लिए बहुत प्रयास करने की आवश्यकता है। केवल कानून बनाने या सख्त करने से काम नहीं चलेगा। बच्चों को संस्कारित करने के ऊपर भी काफी जोर देने की आवश्यकता है। 

Posted By: Amit Mishra