नई दिल्‍ली, ऑनलाइन डेस्‍क। दिल्‍ली के भजनपुरा में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया है। एक कोचिंग की इमारत गिरने से वहां पढ़ाई कर रहे पांच छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई है। हालांकि अभी भी कई छात्र लापता बताए जा रहे हैं। दिल्‍ली में पहले भी ऐसे कई हादसे होते रहे हैं। आए दिन शोरशराबा होता है। वहीं कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जाती है और कुछ दिनों बाद सारा मामला शांत हो जाता है। आज के हुए इस हादसे ने दिल्‍ली के पिछले एक दशक के हुए सबसे बड़े हादसे की याद दिला दी, जब ललिता पार्क में इमारत के गिरने से 70 लोगों की मौत हो गई थी। इस हादसे की कार्रवाई की बात जब आप जानेंगे तब आपको यह सुनकर आश्‍चर्य होगा कि जिस इमारत के गिरने से 70 लोगों की मौत और 77 लोग घायल हुए थे उसमें मात्र एक जेई (जूनियर इंजीनियर) को दोषी मनाया गया। आप जुर्माने की राशि सुन कर तो चौंक उठेंगे, प्रशासन ने इसमें एक्‍शन लेते हुए जेई को मात्र 21 हजार रुपया जुर्माना किया गया था। यह रकम उसके पेंशन से काटी गई थी।

क्‍या था ललिता पार्क हादसा

ललिता पार्क के इस भवन में हर मंजिल पर छज्जे से ही दीवारें खड़ी की गई थीं। भवन में करीब 200 लोग रहते थे। रविवार का दिन होने से करीब 150 लोग मकान में ही थे, तभी हादसा हो गया और 70 लोगों की जान चली गई। 77 लोग जख्मी हुए थे। पुलिस ने मकान मालिक अमृत सिंह को गिरफ्तार किया था, जबकि नगर निगम ने कई अफसरों को निलंबित कर दिया था। इनमें जेई सीबी सिंह और एई राकेश कुमार भी शामिल थे। हालांकि, इन दोनों को बाद में एक अन्य मामले में निगम ने बर्खास्त कर दिया था।

इसके अलावा भी दिल्‍ली में कई हादसे हुए हैं जिसने यहां की सरकारी व्‍यवस्‍था पर कई बार सवालिया निशान लगाया है मगर सख्‍त कार्रवाई की बात करें तो ऐसा कम ही देखने को मिलता है।

पांच जनवरी, 2020 को पूर्वी दिल्ली के गांधीनगर इलाके में एक इमारत के ढह गई थी। इस हादसे में दो लोग घायल हो गए थे। जानकारी मिलते ही दमकल की चार गाड़ियों को मौके पर भेजा कर राहत बचाव कार्य शुरू किया गया था।

पिछले साल दो सितंबर 2019 को दिल्ली के ही सीलमपुर इलाके में सोमवार देर रात एक बड़ा हादसा हो गया था। यहां एक चार मंजिला इमारत गिरने से इसमें कई लोग फंस कर मदद की गुहार लगा रहे थे। बाद में आनन-फानन में छह लोगों को बचाव दल ने सुरक्षित निकाला था।

इसके अलावा चांदनी चौक, लक्ष्‍मीनगर, मंडावली में भी इमारत गिरने के हादसे होते रहे हैं। यह सभी सघन आबादी वाले इलाके हैं। यहां की गलियां भी काफी सकरी होती है। राहत बचाव कार्य में काफी समय लगता है जिसके कारण कई लोगों की जान समय रहते बच सकती है मगर देरी के कारण कई सांसें की डोर टूट जाती है।

Posted By: Prateek Kumar

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