नई दिल्ली [रीतिका मिश्रा]। जिस उम्र में आमतौर पर खिलाड़ी सन्यास ले लेते हैं उस उम्र में दिल्ली की रोशनी गुलाटी युवाओं सा जोश दिखा रही हैं। रोशनी की उम्र 52 साल हैं, लेकिन लांग जंप, हाई जंप, हर्डल एवं दौड़ में वह अपने किसी युवा साथी से कम फुर्तीली और जोश से सराबोर नजर नहीं आतीं। उन्होंने इस साल फरवरी माह में मणिपुर के खुमान लंपक स्टेडियम में मास्टर्स एथलिटिक एसोसिएशन ऑफ मणिपुर द्वारा आयोजित 41वें नेशनल मास्टर्स एथलिटिक चैंपयिनशिप 2020 में आयोजित खेलों में तीन गोल्ड व एक सिल्वर मेडल जीता है। रोशनी के मुताबिक खेल उनकी रग-रग में है। इसलिए वह उम्र के आखिरी पड़ाव तक खेलते रहना चाहती हैं। रोशनी को साल 1998 में इंदिरा अवार्ड और साल 2008 में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से राज्य पुरस्कार भी मिल चुका है।

रोजाना करती हैं प्रैक्टिस

खेल की दुनिया में चमकने के साथ ही साथ रोशनी शिक्षा निदेशालय में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के सुपरवाइजर के पद पर पदस्थ हैं, लेकिन ऑफिस से अपने व्यस्त शेड्यूल से तीन से चार घंटे निकालकर वह रोज शाम को द्वारका सेक्टर- 10 स्थित ग्राउंड में प्रैक्टिस करती हैं। उनका कहना है कि बुजुर्ग होने की वजह से उन्हें अपने हम उम्र का साथ नहीं मिल पाता है। फिर भी वह प्रैक्टिस ग्राउंड पर युवा प्लेयर्स को मात देने में पीछे नहीं रहती। खेलों के साथ-साथ वो बहुत ही समाजिक भी है। उनको जहां कहीं भी कोई गरीब या जरुरतमंद दिखता तो बस वो पहुंच जाती उसकी मदद करने।

बचपन से है खेलों से लगाव

रोशनी को खेलों के प्रति लगाव तो बचपन से ही है। बो बताती हैं कि वो मात्र नौ साल की थी, जब उन्होंने साल का पहला नेशनल मिनी मीट खेला था और लांग जंप में नया कीर्तिमान स्थापित किया था। आज वो जिस मुकाम पर है उसमें वह अपनी मां और पति का अहम योगदान मानती हैं। वो बताती हैं कि जब वो बहुत छोटी थी तो उनका खेलों के प्रति लगाव देखकर उनकी मां भी रोजाना सुबह तड़के उठकर उनके साथ व्यायाम करने जाती और ट्रैक पर उनके बराबर दौड़ लगाती थी।

गंभीर बीमारी ने फिर कराई खेल की शुरुआत

रोशनी बताती है कि साल 2004 में उनको पता चला कि वह गंभीर रुप से आर्थराइटिस की बीमारी है। डॉक्टर ने उन्हें पूरी तरह से बेड रेस्ट की सलाह दी। इलाज के बाद एक दिन उन्हें पता चला कि 35 उम्र से अधिक उम्र वालों के लिए नेहरु स्टेडियम में ट्रायल हो रहे हैं। ट्रायल में जाने से पहले उन्होंने दिन-रात खूब प्रैक्टिस की और फिर बेहतरीन प्रदर्शन देने के बाद पांडिचेरी में आयोजित ऑल इंडिया मास्टर्स एथलिटिक चैंपयिनशिप में 100 मीटर हर्डल में हिस्सा लेकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। वो बताती है कि बीमारी में एक पल तो ऐसा लगा कि जैसे वो अब कभी खेल नहीं पाएंगी लेकिन मेहनत और लगन से वो ठीक होकर वो आगे बढ़ती गई।

लगा दी पुरस्कारों की झड़ी

  • ऑल इंडिया मास्टर्स एथलेटिक चैंपयिनशिप 2006 में 100 मीटर हर्डल में द्वितीय पुरस्कार
  • 14वें एशिया मास्टर्स एथलैटिक चैंपयिनशिप 2006 में 100 मीटर रिले में तृतीय पुरस्कार
  • 29वें नैशनल मास्टर्स एथलैटिक चैंपयिनशिप 2008 में 100 मीटर में प्रथम पुरस्कार
  • 15वें एशिया मास्टर्स एथलैटिक चैंपयिनशिप 2008 में दो गोल्ड व 2 सिल्वर मेडल
  • मलेशिया में आयोजित एशियन मास्टर्स 2010 में गोल्डन वीमेन का खिताब
  • हैदराबाद में आयोजित नेशनल मास्टर्स में सर्वश्रेष्ठ एथलीट का खिताब
  • 41वें नेशनल मास्टर्स एथलिटिक चैंपयिनशिप 2020 में तीन गोल्ड व एक सिल्वर मेडल

 

Posted By: Prateek Kumar

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