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चेसबाजार के फाउंडर विक्रमजीत ने बताया चेस बोर्ड्स की दुनिया में कैसे हासिल की बादशाहत

विक्रमजीत की मानें तो उनके शतरंज सेट हाथों से बनाए जाते हैं। लघु उद्यमी इनका निर्माण करते हैं। वह कहते हैं पहले पहल उन्हें मनाने में थोड़ा वक्त लगा। कुछ चुनौतियां भी रहीं। देश भर में फैले कारीगरों से संपर्क करने की अपनी चुनौतियां रहीं।

By Mangal YadavEdited By: Published: Sat, 16 Oct 2021 11:17 AM (IST)Updated: Sat, 16 Oct 2021 11:17 AM (IST)
चेसबाजार के फाउंडर विक्रमजीत ने बताया चेस बोर्ड्स की दुनिया में कैसे हासिल की बादशाहत
विक्रमजीत सिंह ने बताया चेस बोर्ड्स की दुनिया में कैसे हासिल की बादशाहत, इनोवेटिव शतरंज में हासिल किया मुकाम

नई दिल्ली [अंशु सिंह]। प्रधानमंत्री ने हाल के अपने अमेरिका दौरे में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस समेत विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों को भारत में निर्मित कलात्मक शतरंज सेट भेंट की, तो देश के कारीगरों का मान बढ़ गया। पंजाब के मोहाली के विक्रमजीत सिंह ने भी एक छोटी-सी शुरुआत की थी। आज इनकी कंपनी ‘चेसबाजार’ चेस बोर्ड्स की दुनिया की शीर्ष निर्माता एवं एक्सपोर्टर कंपनी बन चुकी है, जो हस्त निर्मित शतरंजों में डील करती है। विक्रमजीत कहते हैं कि नींव जितनी मजबूत होती है, बिजनेस में बने रहना उतना आसान होता है।

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इनकी मानें, तो बाजार हर दिन बदलता रहता है। इसलिए टेक्नोलाजी के साथ उस पर पैनी निगाह रखते हैं। साथ ही अपने प्रोडक्ट में इनोवेशन करते हैं। अपनी कंपनी को एक सम्मानित ब्रांड बनाने को वह अपनी सफलता मानते हैं।

कारीगरों को प्रशिक्षित कर बढ़ा आगे

विक्रमजीत की मानें, तो उनके शतरंज सेट हाथों से बनाए जाते हैं। लघु उद्यमी इनका निर्माण करते हैं। वह कहते हैं, 'पहले पहल उन्हें मनाने में थोड़ा वक्त लगा। कुछ चुनौतियां भी रहीं। देश भर में फैले कारीगरों से संपर्क करने की अपनी चुनौतियां रहीं। क्योंकि क्वालिटी चेक करने के लिए हर किसी के पास जाना संभव नहीं था। इसके अलावा, एक कारीगर हर दिन सीमित संख्या में ही चेस सेट्स बना सकता है। इसलिए सिंगल आर्डर के लिए अनेक कारीगरों पर निर्भर रहना पड़ा। हालांकि एक समय के बाद हमने अपने कारीगरों को प्रशिक्षित किया। उन्हें गुणवत्ता पर ध्यान देने को कहा, जिससे चीजों को संभालना आसान हो गया।

हमारे ज्यादातर आर्डर्स अंतरराष्ट्रीय बाजारों से आते थे, जिसके कारण पूंजी को लेकर भी समस्याएं रहीं। हर दिन का स्टाक रखना पड़ता था।' वह अधिकांश प्रोडक्ट्स स्थानीय कारीगरों से ही लेते हैं, जो अपने घरों या छोटे कारखानों से काम करते हैं। इनसे जुड़ने के कारण न सिर्फ उनका बिजनेस बढ़ा, बल्कि कारोबार के लिए जरूरी पूंजी भी मिली। कहते हैं, अच्छा लगता है जब कारीगर नौकरी के लिए बड़े शहरों में जाने के बजाय अब खुद का काम कर रहे हैं। उनके पास रोजगार की कमी नहीं है। वे अच्छा कमा रहे हैं। अपने बच्चों की अच्छी परवरिश और शिक्षा-दीक्षा पर खर्च कर पा रहे हैं।

तकनीक की रही अहम भूमिका

आज कारोबार की सफलता में तकनीक की भूमिका अहम मानी जा रही है। विक्रमजीत को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर से अपना काम शुरू करने में तकनीक से काफी मदद मिली। वह बताते हैं, एक बार एक्सपोर्ट बिजनेस स्थापित हो गया और विदेशी मार्केट में हमारे ब्रांड को पहचान मिल गई, तो हमने देश में इसकी मार्केटिंग करनी शुरू की। इसमें टेक्नोलाजी का साथ मिला। उससे देश-विदेश के हर कोने में हम अपने प्रोडक्ट की आपूर्ति कर पाए। गूगल सर्च, गूगल एडवर्ड एवं गूगल एनालिटिक्स जैसे टूल्स काफी कारगर रहे। इनसे दुनिया भर के खरीदारों तक पहुंचना आसान रहा।

विक्रमजीत सिंह ने वर्ष 1999 में बतौर मेडिकल ट्रांसक्रिप्शनिस्ट करियर की शुरुआत की थी। लेकिन वह हमेशा से एक उद्यमी बनना चाहते थे। इसलिए नौकरी के साथ ही पार्टटाइम अलग-अलग कारोबारों को आजमाते रहते थे। 2007 में चेसबाजार शुरू करने से पहले भी उन्होंने कई तरह के कारोबार किए, जिससे यह तय करना आसान हो गया कि आगे क्या करना है? वह बताते हैं, ‘मैंने महज दो हजार रुपये से चेसबाजार शुरू किया था। अमृतसार के स्थानीय बाजार से शतरंज के कुछ सेट्स लेकर आया था। मुझे पता था कि हाथ से बने प्रोडक्ट की क्वालिटी अच्छी है और वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी कमाई कर सकता है।'

[विक्रमजीत सिंह निर्माता एवं एक्सपोर्टर, चेसबाजार]


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