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Delhi: दिल की बीमारियां हैं सबसे बड़ा किलर, फिर भी AIIMS में सिर्फ तीन दिन ओपीडी; इलाज के लिए दो माह की वेटिंग

देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स में दिल की बीमारियों के इलाज के लिए सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही जनरल ओपीडी होती है। इस वजह से ओपीडी में वेटिंग की समस्या बनी हुई है। (फाइल फोटो)

By Ranbijay Kumar SinghEdited By: Abhi MalviyaPublished: Fri, 26 May 2023 12:21 AM (IST)Updated: Fri, 26 May 2023 12:21 AM (IST)
इस वजह से ओपीडी में वेटिंग की समस्या बनी हुई है।

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब जीवनशैली के बीच दिल की बीमारियां बढ़ रही है। यह बात पहले कई शोधों में सामने आ चुकी है। मौत का सबसे बड़ा कारण भी दिल की बीमारियां बन रही हैं, लेकिन देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स में दिल की बीमारियों के इलाज के लिए सप्ताह में सिर्फ तीन दिन ही जनरल ओपीडी होती है। इस वजह से ओपीडी में वेटिंग की समस्या बनी हुई है।

कैसे दूर हो सकती है वेटिंग की समस्या?

मौजूदा स्थिति यह है कि दिल की बीमारी से पीड़ित किसी मरीज को यदि एम्स की ओपीडी में दिखाना हो तो वह आसान से दिखा नहीं सकता। ओपीडी में दिखाने के लिए करीब दो माह की वेटिंग है। संस्थान के डाक्टर कहते हैं कि यदि जनरल ओपीडी का समय बढ़े तो ओपीडी में वेटिंग की समस्या दूर हो सकती है।

मौजूदा समस्या से एम्स प्रशासन भी अनजान नहीं है। एम्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संस्थान के कार्डियोथोरेसिक सेंटर का प्रबंधन भी कार्डियोलाजी व कार्डियोथोरेसिक सर्जरी की ओपीडी के संचालन का समय बढ़ाना चाहता है।

कार्डियक न्यूरो सेंटर में ओपीडी में जगह की कमी आड़े आ रही है। इस सेंटर में ही कार्डियोलाजी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, न्यूरोलाजी व न्यूरो सर्जरी की ओपीडी होती है। न्यूरोलाजी की जनरल ओपीडी सप्ताह में पांच दिन होती है। वहीं कार्डियोलाजी व कार्डियोथोरेसिक सर्जरी की जनरल ओपीडी सप्ताह में सिर्फ तीन दिन होती है। इसके अलावा एक दिन बृहस्पतिवार को विशेष क्लीनिक चलता है। इस विशेष क्लीनिक में नए मरीज नहीं देखे जाते।

एम्स के कार्डियोलाजी विभाग की ओपीडी में हर वर्ष करीब डेढ़ लाख व कार्डियोथेरेसिक सर्जरी की ओपीडी में हर वर्ष करीब दो लाख मरीज देखे जाते हैं। इस वजह से ओपीडी में प्रतिदिन करीब दो हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।

मौजूदा समय में कार्डियोलाजी विभाग की जनरल ओपीडी में दिखाने के लिए 17 जुलाई से पहले का अप्वाइंटमेंट उपलब्ध नहीं है। इस समस्या के समाधान के लिए कार्डियोथोरेसिक सेंटर के प्रबंधन ने मस्जिद मोठ स्थित नए ओपीडी ब्लाक में कार्डियोलाजी ओपीडी के लिए जगह उपलब्ध कराने की मांग की थी। ताकि ओपीडी के संचालन का समय बढ़ाया जा सके।

नए ओपीडी ब्लाक में एम्स के मुख्य अस्पताल के सभी विभागों की ओपीडी होती है। उसमें जगह की कमी बताकर एम्स ने कार्डियोलाजी की ओपीडी के लिए जगह उपलब्ध कराने से मना कर दिया। इस वजह से मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

एक तिहाई से ज्यादा मौतों का कारण बनती हैं दिल की बीमारियां

देश में 30 से 69 वर्ष की उम्र के करीब एक तिहाई से ज्यादा (36 प्रतिशत) मौतों का कारण हृदय रक्तवाहिकाओं की बीमारी बन रही है। दिल्ली में भी दिल की बीमारियों के कारण सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। वर्ष 2021 में हार्ट अटैक से 29,546 लोगों की मौतें हुई थीं। फिर भी दिल्ली में एम्स, सफदरजंग, आरएमएल, जीबी पंत व राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी जैसे चुनिंदा अस्पतालों में ही इसके इलाज की सुविधा है।

ऐसी स्थिति में एम्स में सप्ताह में तीन दिन ही ओपीडी होना मरीजों की परेशानी बढ़ाने वाला है। इस संदर्भ में एम्स के कार्डियोथेरेसिक के प्रमुख डा. बलराम भार्गव से संपर्क करने की कोशिश की गई। वाट्सएप पर मैसेज भेजकर भी पक्ष लेने की कोशिश की गई लेकिन जवाब नहीं मिला।

रिपोर्ट इनपुट- रणविजय सिंह


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