By Jagran NewsEdited By: Kapil Kumar Published: Thu, 19 Jun 2025 01:33 PM (IST)
Delhi water crisis दिल्ली में जल संकट गहराता जा रहा है। नई दिल्ली दक्षिणी दिल्ली और बाहरी दिल्ली के कई ...और पढ़ें
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। Delhi water tanker shortage राजधानी में गर्मियों में हर साल की तरह इस बार भी कई इलाके जल संकट की चपेट में हैं। इसमें नई दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और बाहरी दिल्ली के कई इलाके हैं, जहां जल बोर्ड के टैंकर ही इन दिनों सहारा हैं। लेकिन जीपीएस ट्रैकिंग के बावजूद टैंकर अपनी राह से भटक जा रहे हैं। नतीजतन लोगों को समय पर टैंकर नहीं मिल पा रहे हैं।
सरकार ने सभी टैंकरों में जीपीएस लगाने के साथ इनकी निगरानी स्थानीय आरडब्ल्यूए और विधायकों को सौंपने का दावा किया था। लेकिन ऐसा हुआ नहीं है। कई आरडब्ल्यूए का कहना है कि निगरानी की उनके पास कोई व्यवस्था नहीं है। ये जल बोर्ड के पास ही है। नई दिल्ली के पहाड़गंज और नबी करीम स्थित लक्ष्मणपुरी तक दर्जनों कॉलोनियों में लोगों को हफ्ते में एक या दो बार ही टैंकर नसीब होता है।
लक्ष्मणपुरी निवासी सुनील मल्होत्रा बताते हैं कि इलाके में रोज ही पानी का संकट होता है। सप्ताह में एक-दो बार टैंकर आ भी जाए तो पानी भरने के लिए धक्का-मुक्की हो जाती है। दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए कई परिवार महंगा बोतलबंद पानी या निजी टैंकर का सहारा लेने को मजबूर हैं।
नबी करीम वार्ड के पार्षद कमल बागड़ी ने बताया कि टैंकर की किल्लत हमेशा रहती है। निवेदन करने पर कभी- कभी दो- तीन दिन में एक बार टैंकर आता है। टैंकरों में लगे जीपीएस की निगरानी जल बोर्ड मुख्यालय से होती है। दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में भी पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है। यहां जैतपुर, मीठापुर, संगम विहार, देवली, ओखला, ओखला फेज दो में संजय कॉलोनी सहित कई ऐसी बस्तियां हैं, जहां पर जल बोर्ड में गुहार लगाने के बाद भी सप्ताह में तीन या चार बार ही टैंकर पहुंचता है।
संजय कॉलोनी की अन्नू शर्मा ने बताया कि एक टैंकर के लिए उन्हें पहले घंटों जल बोर्ड के ऑफिस में बैठना पड़ता है। टैंकर आ जाए तो पानी के लिए मारामारी होती है। लोगों के घर में जरूरतों के लिए भी पानी नहीं है, मजबूरी में निजी टैंकर से पानी खरीदना पड़ता है। कमोबेश जैतपुर में भी यही स्थिति है। वहां भी कई-कई दिन में जल बोर्ड के टैंकर से पानी की आपूर्ति होती है। लोग फोन कर-करके थक जाते हैं, तब भी टैंकर नहीं आता है।
आस्था कुंज पार्क के पास रहने वाली राधा देवी ने बताया कि उनके यहां जल बोर्ड की ओर से नियमित आपूर्ति हो रही है। दिन में दो बार टैंकर से पानी की आपूर्ति की जा रही है। फेडरेशन आफ आरडब्ल्यूए साकेत के प्रधान राकेश डबास ने बताया कि उनके यहां भी पानी की किल्लत है, टैंकर मंगवाते हैं तो आ जाते हैं, मगर उनकी निगरानी के लिए आरडब्ल्यूए के पास किसी तरह की कोई सूचना या जानकारी नहीं है।
उन्होंने बताया कि टैंकरों में लगे जीपीएस की निगरानी जल बोर्ड के मुख्यालय से होती है। किराड़ी में टैंकर के लिए सप्ताह भर की वेटिंग बाहरी दिल्ली के किराड़ी, जहांगीरपुरी, हैदरपुर, बवाना, नरेला आदि क्षेत्रों की दर्जनों कालोनियों की आबादी टैंकर के पानी पर आश्रित है। इन कॉलोनियों में पानी के टैंकर के लिए मारामारी की स्थिति है। किराड़ी में टैंकर के लिए सप्ताहभर की वेटिंग चल रही है। यानी, आपने टैंकर की मांग आज नोट कराई तो आपको पानी सप्ताहभर बाद मिलेगा। यह हाल तब है, जब किराड़ी क्षेत्र में 27 टैंकर हैं।
किराड़ी आरडब्ल्यूए फेडरेशन का कहना है कि पानी के टैंकर के लिए कई-कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। जहांगीरपुरी के कई ब्लाक में लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ई-ब्लॉक के लोगों का कहना है कि एक टैंकर के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है।
नरेला की संजय कालोनी आरडब्ल्यूए के संयुक्त सचिव विनीत कुमार बताते हैं कि पहले एक दिन छोड़कर अगले दिन पानी आता था, अब चार दिन में एक बार जलापूर्ति की जा रही है। टैंकर मिलना यहां लगभग असंभव है। होलंबी जलाशय केंद्र में कुल आठ पानी के टैंकर हैं। इन आठ टैंकर पर नरेला और बवाना दो विधानसभा क्षेत्र के लोग आश्रित हैं, इसी से स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। लोग खरीदकर पानी पी रहे हैं।
पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर में पीने के पानी की समस्या है। यहां एक दिन के अंतराल पर दो से तीन बजे के बीच पानी का टैंकर आता है। इस क्षेत्र में लोगों के घर सबमर्सिबल लगे हैं, लेकिन पेयजल पीने लायक नहीं हैं। न्यू सीलमपुर के सीपीजे ब्लॉक के करीब 25 घरों में पानी नहीं आता, क्योंकि पाइपलाइन में प्रेशर नहीं है। यह ब्लॉक ऊंचाई पर है। इनके पास रोज सुबह आठ बजे पानी का टैंकर समय से आ रहा है। रानी गार्डन की झुग्गियों में रोज सुबह आठ बजे पानी का टैंकर आता है, क्योंकि यहां पानी के कनेक्शन नहीं हैं।