नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। भलस्वा लैंडफिल साइट पर कूड़े में लगी आग 12 वें दिन शनिवार को भी पूरी तरह नहीं बुझ पाई। कूड़े के पहाड़ में कुछ जगह से अब भी थोड़ी आग लगी हुई है। इस वजह से धुआं उठता दिखाई दे रहा है। हालांकि, दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आग पर लगभग काबू पा लिया गया है, जहां भी ज्वलनशील गैस की वजह से आग लगती है, वहां पर पानी का छिड़काव कर बुझा दिया जा रहा है। दमकल अधिकारी ने बताया कि आग पर लगभग काबू पा लिया गया है।

कूड़े के अंदर उत्पन्न होने वाली मीथेन जैसी ज्वलनशील गैसों की वजह से आग लग जा रही है। 24 घंटे दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर तैनात हैं। पहले छह गाड़ियां तैनात रहती थी, लेकिन अब दो गाड़ियां 24 घंटे तैनात रहती हैं। दरअसल, मंगलवार शाम 26 अप्रैल को भलस्वा लैंडफिल साइट पर कूड़े में आग लगी थी। दमकल कर्मी लगातार आग बुझाने के प्रयास कर रहे हैं। धुएं की वजह से आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आसपास फैले धुएं की वजह से पास के एक स्कूल को भी बंद कर दिया गया है। भलस्वा लैंडफिल साइट पर कूड़े में आग अब काफी हद तक बुझ चुकी है। 

भलस्वा में चार साल में लग चुकी है 22 बार आग: वर्ष 2019 से लेकर 2022 तक भलस्वा, गाजीपुर व तुगलकाबाद लैंडफिल साइट पर 75 से ज्यादा बार आग लग चुकी है। चार वर्ष में सबसे ज्यादा आग तुगलकाबाद लैंडफिल साइट पर कूड़े में लगी है। इस साइट पर 33 बार आग लग चुकी है। वहीं, भलस्वा लैंडफिल साइट पर 22 व गाजीपुर लैंडफिल साइट पर 21 बार आग लग चुकी है। आग लगने का सबसे ज्यादा खामियाजा यहां आसपास रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ता है। पर्यावरण के साथ लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।

भलस्वा लैंडफिल साइट पर कूड़े में लगी आग 12 वें दिन शनिवार को भी पूरी तरह नहीं बुझ पाई। कूड़े के पहाड़ में कुछ जगह से अब भी थोड़ी आग लगी हुई है। इस वजह से धुआं उठता दिखाई दे रहा है। हालांकि, दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आग पर लगभग काबू पा लिया गया है, जहां भी ज्वलनशील गैस की वजह से आग लगती है, वहां पर पानी का छिड़काव कर बुझा दिया जा रहा है।

दमकल अधिकारी ने बताया कि आग पर लगभग काबू पा लिया गया है। कूड़े के अंदर उत्पन्न होने वाली मीथेन जैसी ज्वलनशील गैसों की वजह से आग लग जा रही है। 24 घंटे दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर तैनात हैं। पहले छह गाड़ियां तैनात रहती थी, लेकिन अब दो गाड़ियां 24 घंटे तैनात रहती हैं।

Edited By: Pradeep Chauhan

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