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दिल्ली दंगे के दौरान पड़ोसी ही बना पड़ोसी का दुश्मन, पिता-पुत्र ने जला दी थी दुकान; कोर्ट ने ठहराया दोषी

दिल्ली दंगे में पड़ोसी की दुकान जलाने के लिए मंगलवार को कड़कड़डूमा कोर्ट ने पिता-पुत्र को दोषी ठहराया है। खजूरी खास गली नंबर-29 निवासी मिट्ठन सिंह और उसके बेटे जानी कुमार को दोषी करार देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि पुलिस इन पर लगे आरोप साबित करने में सफल रही।

By ashish guptaEdited By: Abhi MalviyaPublished: Tue, 28 Mar 2023 08:02 PM (IST)Updated: Tue, 28 Mar 2023 08:02 PM (IST)
दिल्ली दंगे के दौरान पड़ोसी ही बना पड़ोसी का दुश्मन, पिता-पुत्र ने जला दी थी दुकान; कोर्ट ने ठहराया दोषी
दिल्ली दंगे में पड़ोसी की दुकान जलाने के लिए मंगलवार को कड़कड़डूमा कोर्ट ने पिता-पुत्र को दोषी ठहराया है।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली दंगे में पड़ोसी की दुकान जलाने के लिए मंगलवार को कड़कड़डूमा कोर्ट ने पिता-पुत्र को दोषी ठहराया है। खजूरी खास गली नंबर-29 निवासी मिट्ठन सिंह और उसके बेटे जानी कुमार को दोषी करार देते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचल ने कहा कि पुलिस इन पर लगे आरोप साबित करने में सफल रही है।

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जमानत पर थे पिता-पुत्र

साक्ष्य और गवाहों से स्पष्ट होता है कि दोनों भीड़ के साथ दंगा व तोड़फोड़ करने और इस केस में जिक्र की गई दुकान को जलाने में शामिल थे। पिता-पुत्र अभी जमानत पर थे, कोर्ट ने इनको हिरासत में लेने का आदेश दे दिया है। अब इस मामले में सजा पर बहस अप्रैल में होगी।

खजूरी खास गली नंबर-29 में रहने वाले आमिर हुसैन की दुकान 25 फरवरी 2020 को दंगाइयों ने जला दी थी। पीड़ित की शिकायत पर स्थानीय पुलिस थाने में इसकी प्राथमिकी की गई थी। घटना वाले दिन उस क्षेत्र में तैनात रहे दो पुलिसकर्मियों ने दंगाई के रूप में मिट्ठन सिंह और उसके बेटे जानी कुमार की पहचान की थी, जिसके बाद पिता-पुत्र से पूछताछ की गई और इनको गिरफ्तार कर लिया गया था।

जून 2020 मे दायर किया था आरोपपत्र

दोनों के खिलाफ जून 2020 में आरोपपत्र दायर किया गया था। नवंबर 2021 में दोनों के खिलाफ कोर्ट ने आरोप तय कर दिए थे, जिसमें इन्होंने खुद को बेगुनाह बताते हुए ट्रायल की मांग की थी।

ट्रायल में शुरू होने पर आरोपितों के वकील ने घटना वाले क्षेत्र में तैनात दो पुलिसकर्मियों की घटनास्थल पर मौजूदगी पर संदेह जताते हुए उनकी गवाही पर सवालिया निशान लगाया था। उनकी ओर से कहा गया कि इन पुलिसकर्मियों ने घटना की कंट्रोल रूम को काल नहीं की थी। डीडी एंट्री न होने की बात भी कही थी। यह भी कहा था कि इस मामले में कोई भी सार्वजनिक गवाह नहीं है।

अभियोजन की तरफ से विशेष लोक अभियोजक नरेश कुमार गौड़ ने पक्ष रखा कि दोनों पुलिसकर्मी घटना के प्राकृतिक गवाह हैं। ये वहां पर ड्यूटी कर रहे थे। सार्वजनिक गवाह स्थानीय निवासी होने के कारण आरोपितों को पहचानने से कतरा रहे हैं। कोर्ट ने सार्वजनिक गवाहों के बयानों का विश्लेषण कर माना कि सभी तो नहीं, लेकिन कुछ ने जानबूझ कर मुकर गए। कोर्ट ने दोनों पुलिसकर्मियों की गवाही को माना और पिता-पुत्र को दोषी करार दे दिया।


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