नई दिल्ली [नेमिष हेमंत]। संक्रमण के भयावह होने से न सिर्फ बेड, आक्सीजन सिलेंडर और दवाओं की किल्लत हो रही है। बल्कि आक्सीमीटर, ग्लब्स और आक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन की भारी किल्लत से भी बाजार जूझने लगा है। स्थिति यह कि चंद दिनों में इनकी मांग में 80 से 100 गुना तक वृद्धि हो चुकी है। इन उत्पादों का बड़ा हिस्सा आयात होता है। अचानक बढ़ी जबरदस्त मांग के कारण अब ये आसानी से बाजार में उपलब्ध नहीं है। अगर कहीं उपलब्ध भी है तो ये कई गुना महंगे दाम पर मिल रहे हैं। कमोबेश यहीं हाल सैनिटाइजर और मास्क का भी है। इनकी मांग भी कई गुना तक बढ़ी है। जिस कारण अब ये अच्छी गुणवत्ता के उपलब्ध नहीं है। इनके भी दाम बढ़ गए हैं।

दिल्ली की थोक दवा मंडी भागीरथ पैलेस में आक्सीमीटर, ग्लब्स और आक्सीजन कंसंट्रेटर नहीं मिल रहे हैं। आक्सीमीटर जिससे शरीर मेें आक्सीजन का लेवल नापा जाता है, वहीं आक्सीजन सिलेंडर में लगाने के लिए आक्सीजन कंसंट्रेटर का इस्तेमाल होता है।

संक्रमण की दूसरी लहर में अधिकतर मरीजों को सांस संबंधी समस्या हो रही है। ऐसे में आक्सीजन सिलेंडर के साथ आक्सीजन कंसंट्रेटर की मांग बढ़ी है। यहां के थोक दुकानदारों के मुताबिक ये उपकरण चीन और जर्मनी से आयात होता है। पहले इनकी मांग केवल अस्पतालों में सीमित थी। इसलिए कभी इसको अधिक संख्या में मंगाने की जरूरत नहीं पड़ी। अब जबकि अस्पतालों में आक्सीजन बेड की सुविधा बढा़ई जा रही है। घर पर भी मरीजों के लिए आक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता पड़ रही है तो इसकी मांग में 200 गुना तक उछाल आ गया है। जिसको पूरा करने में बाजार विफल साबित हो रहा है। स्थिति यह कि जिसके पास है वे इसे दो से तीन गुने अधिक दाम पर बेच रहे हैं। सामान्य दिनों में जिस आक्सीजन कंसंट्रेटर के दाम 20 से 22 हजार रुपये थे, अब वह सीधे 50 हजार रुपये तक में बिक रहे हैं।

यहीं हाल आक्सीमीटर का भी है। घर-घर इसकी जरूरत पड़ रही है। ये भी उत्पाद चीन और जर्मनी से आता है। ये भी बाजार में नहीं उपलब्ध नहीं है। इसका असर इसके दाम पर पड़ा है। जो आक्सीमीटर पहले 700 से 1000 रुपये तक में उपलब्ध थे। अब उसके दाम दो से ढ़ाई हजार रुपये हो गए हैं। जो ग्लब्स 150 रुपये प्रति 100 मिलते थे। अब उनकी कीमत 500 रुपये हो गई है। एन-95 मास्क की कीमत 200 से 300 रुपये के बीच हो गई है। इस संबंध में सर्जिकल उपकरण निर्माता व बिक्री एसोसिएशन के अध्यक्ष पुनीत भसीन ने कहा कि स्थिति काफी विकट है। क्योंकि मांग के अनुसार उपकरण बाजार में उपलब्ध नहीं है। इसलिए किल्लत हो रही है।

विटामिन की गोलियां भी हो रही बाजार से गायब

विटामिन की गोलियां भी बाजार से गायब होने लगी है। इसके पीछे कारण यह कि लोग कोरोना संक्रमण से बचने के लिए ऐहतियातन खुद से ही इसका इस्तेमाल करने लगे हैं। इस कारण इनकी मांग में भी कई गुना का इजाफा हाे गया है। दवा की कई दुकानों के साथ स्टाकिस्टों के पास से यह गायब हो गए हैं। इस संबंध में दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव आशीष ग्रोवर ने कहा कि यह स्थिति लोगों के भय से पैदा हुई है। लोग घर के हर सदस्यों को जिंक के साथ मल्टीविटामिन्स देने लगे हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी लोग गोलियां निगलने लगे हैं। आशीष ग्रोवर ने कहा कि लोगों को डर और भय में आने की जगह अच्छे और गुणवत्तापूर्ण खानपान पर ध्यान देना चाहिए।

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