नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली विश्वविद्यालय फंड की कमी से जूझ रहा है। पर्याप्त फंड नहीं होने के चलते विभिन्न विभागों के लिए प्रयोगशाला (लैब) के उपकरण खरीदने में दिक्कत पेश आ रही है। डीयू द्वारा गठित चार सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इस चिंताजनक स्थिति की तरफ इशारा किया है। उपकरणों की खरीद के लिए डीयू को डेवलपमेंट फंड के प्रयोग संबंधी नियमों में संशोधन तक करना पड़ा। जिसके बाद 52 करोड़ रुपये धनराशि आवंटित किए गए।

डीयू के विभिन्न विभाग प्रयोगशाला के लिए नए उपकरण नहीं खरीद पा रहे हैं। विभाग लगातार इस बाबत डीयू प्रशासन को पत्र लिख रहे थे। इसके बाद डीयू ने एक चार सदस्यीय कमेटी गठित की। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उपकरणों की खरीद के लिए यूजीसी से पर्याप्त अनुदान नहीं मिल रहा है। ऐसा विगत तीन चार सालों से हो रहा है। इस साल तो सिर्फ 1.25 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए। इतने कम धनराशि से एक उपकरण भी खरीदा नहीं जा सकता। ऐसा नहीं हैं कि उपकरणों की खरीद ही समस्या हो।

एयरकंडीशन प्लांट, इंजीनियरिंग से संबंधित कार्यों के लिए भी फंड की कमी आड़े आ रही है। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अकादमिक कार्य प्रभावित न हो इसके लिए डेवलपमेंट फंड से धनराशि आवंटित करना पड़ेगा। लिहाजा, डेवलपमेंट फंड के प्रयोग के 2015 के नियमों में बदलाव किया गया। पहले नियम मुताबिक हाल, छात्रावास, गेस्ट हाउस में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने का प्रविधान था। जिसे संशोधित कर रिपेयर, पुनर्विकास, सुंदरीकरण, एसी प्लांट की देखरेख, प्रयोगशाला की देखरेख जोड़ा गया।

पेंशन की भी होगी दिक्कत

डेवलपमेंट फंड के प्रयोग संबंधी नियमों का प्रस्ताव हाल ही में कार्यकारी परिषद की बैठक में भी पेश किया गया था। कार्यकारी परिषद के सदस्य राजपाल सिंह कहते हैं कि पढ़ाई, शोध के लिए नए उपकरणों की खरीद जरूरी होती है। इसलिए डेवलपमेंट फंड से धनराशि आवंटित की गई। लेकिन समस्या अभी खत्म नहीं होने वाली है। पेंशन के लिए यूजीसी 20 करोड़ रुपये अनुदान देती हैं। लेकिन इस बार 14 करोड़ ही मिला है। अगले महीने पेंशन संबंधी समस्या से भी दो चार होना पड़ सकता है। 

Edited By: Prateek Kumar