नई दिल्ली [संजीव कुमार मिश्र]। स्नातक दाखिले के नियमों को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय और सेंट स्टीफंस कालेज के बीच उपजा विवाद फिलहाल शांत होता नजर नहीं आ रहा है। सेंट स्टीफंस कालेज ने डीयू प्रशासन को पत्र लिखा है, जिसमें कालेज ने डीयू से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की गुजारिश की है। कालेज सूत्रों ने बताया कि दो पेज का पत्र भेजा गया है। इसमें कालेज ने कहा है कि डीयू को साक्षात्कार संबंधी लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

अल्पसंख्यक कालेज को मिले अधिकारों का भी हवाला दिया गया है। कालेज ने लिखा है कि सेंट स्टीफंस को अल्पसंख्यक कालेज का दर्जा प्राप्त है। इस नाते भी दाखिले को लेकर निर्णय लेने समेत कई अन्य तरह के अधिकार मिले हुए हैं। कालेज ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट समेत अन्य अदालतों के फैसले से डीयू को पहले भेजे गए पत्र में अवगत कराया गया था। लेकिन, ऐसा प्रतीत होता है कि डीयू ने उसे पढ़ा नहीं है। कालेज ने साक्षात्कार को छात्रों के लिए जरूरी भी बताया है।

कालेज ने पत्र में सुप्रीम कोर्ट के 1992 के निर्णय का विशेष उल्लेख किया है। कालेज के एक पदाधिकारी ने बताया कि सेंट स्टीफंस कालेज पहले भी दाखिले के लिए साक्षात्कार लेता रहा है। कालेज के एक शिक्षक ने इस मामले पर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कहा कि जब सभी कालेज डीयू नियमों के तहत दाखिला देते हैं तो फिर कालेज के लिए अलग मापदंड क्यों? तब कालेज ने अपनी दलील दी थी कि विभिन्न बोर्ड के छात्र आते हैं। इसलिए साक्षात्कार जरूरी हो जाता है। अदालत ने साक्षात्कार की सीमा 15 प्रतिशत तक निर्धारित की थी। बाद के वर्षाें में अदालत के फैसले से अल्पसंख्यक छात्रों का कोटा भी बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया था।

विवाद की वजह

अल्पसंख्यक कालेजों को आरक्षित सीटों पर 85 प्रतिशत सीयूईटी और 15 प्रतिशत साक्षात्कार से दाखिला देना है। गैर आरक्षित सीटों पर शत प्रतिशत दाखिले सीयूईटी से देने हैं। लेकिन, सेंट स्टीफंस कालेज गैर आरक्षित सीटों पर भी दाखिले का आधार 85 प्रतिशत सीयूईटी और 15 प्रतिशत साक्षात्कार निर्धारित करना चाहता है। कालेज ने सोमवार को जारी प्रास्पेक्टस में भी इसका जिक्र किया था, जिसके बाद डीयू ने सख्त ऐतराज जताया था। डीयू ने कहा था कि यदि सेंट स्टीफंस कालेज नियम नहीं मानेगा तो दाखिले अमान्य होंगे। डीयू ने कालेज को वेबसाइट से प्रास्पेक्टस हटाने के लिए कहा था।

Edited By: Prateek Kumar