नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीपीसी) के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों के बीच पद छोड़ने और जनरल हाउस की बैठक तीन माह पहले कराने का एलान कर दिया है। कार्यकारिणी ने बृहस्पतिवार को इसके लिए प्रस्ताव पास करके गुरुद्वारा निर्वाचन अधिकारी से इस महीने की 27 से 29 तारीख के बीच जनरल हाउस की बैठक कराने की मांग की है, जिससे कि नए पदाधिकारियों का चुनाव हो सके।

नई कमेटी चुने जाने तक वर्तमान पदाधिकारी अपने पद पर बने रहेंगे। पिछले कुछ महीने से कमेटी के अध्यक्ष जीके पर पूर्व अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना व अन्य विरोधी भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे थे। कमेटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा से भी उनके मतभेद सतह पर आ गए थे।

मतभेद की वजह से पिछले दिनों जीके ने वरिष्ठ उपाध्यक्ष को और सिरसा ने उपसचिव को जिम्मेदारी सौंपकर अपने कार्यालय से दूरी भी बना ली थी। उसके बाद से ही कार्यकारिणी भंग करने के कयास लग रहे थे। बृहस्पतिवार को जीके की अध्यक्षता में कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई।

गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव पर होने वाले कार्यक्रमों सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही नई कार्यकारिणी की चुनाव कराने का फैसला पास किया गया। इसके बाद जीके ने कहा कि जो आरोप लगाए गए हैं, उनकी जांच हमारी अध्यक्षता वाली कमेटी भी करा सकती थी, लेकिन निष्पक्ष जांच के लिए यह काम नई कमेटी करेगी।

उन्होंने कहा कि एक्ट में प्रावधान है कि 21 दिनों का नोटिस देकर कार्यकारी का नया चुनाव कराया जा सकता है। कमेटी भंग नहीं हुई है। जनरल हाउस की बैठक में पांच पदाधिकारियों के साथ ही 10 कार्यकारी सदस्यों का चुनाव होगा। तय समय के अनुसार अगले वर्ष मार्च के अंतिम सप्ताह में जनरल हाउस की बैठक होनी थी जो कि अब इसी माह होगी। कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है।

 इस मुद्दे पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने कहा कि गुरुद्वारा कमेटी एक धार्मिक संस्था है। इस पर किसी तरह का आरोप ठीक नहीं है। इसलिए समय से पहले जनरल हाउस की बैठक कराने का फैसला किया है। जो भी पदाधिकारी चुनकर आएंगे वह आरोपों की जांच कराएंगे। संगत ने हमें चुनकर भेजा है इसलिए उसके प्रति जिम्मेदार है। जबतक जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक मैं अध्यक्ष के पद पर नहीं रहना चाहता हूं। पार्टी हाई कमान के सामने भी मैंने यह बात रखी है, जिसे उसने स्वीकार कर लिया गया है।