नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। धार्मिक संस्था दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) का चुनाव इस बार विवादों में घिर गया है। विवाद गहराता जा रहा है और इस कारण चुनाव परिणाम घोषित होने के एक माह बाद भी अध्यक्ष व कार्यकारिणी का चयन नहीं हो सका है। मामला अदालत में पहुंच गया है जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दिल्ली की सिख राजनीतिक के जानकारों का कहना है कि डीएसजीएमसी के इतिहास में पहली बार इस तरह से विवाद हुआ है। इससे संस्था की प्रतिष्ठा भी धूमिल होती है।

22 अगस्त को डीएसजीएमसी का चुनाव हुआ और 25 अगस्त को चुनाव परिणाम घोषित किए गए। 46 सीटों में से शिअद बादल को 27, शिअद दिल्ली (सरना) को 14, जग आसरा गुरु ओट (जागो) को तीन और पंथक अकाली लहर को एक सीट पर जीत मिली। बाद में शिअद बादल ने सरना गुट के एक सदस्य को अपने पाले में शामिल कर लिया। उसके बाद नामित सदस्यों के चुनाव को लेकर शुरू हुआ विवाद सुलझने का नाम नहीं ले रहा है।

निदेशक ने दर्ज कराई एफआइआर

नौ सितंबर को नामित सदस्यों के चुनाव के लिए डीएसजीएमसी के नवनिर्वाचित सदस्यों की बैठक बुलाई गई। गुरुद्वारा सिंह सभाओं के अध्यक्षों की सूची को लेकर विवाद शुरू हुआ जिससे गुरुद्वारा चुनाव निदेशक ने बैठक स्थगित करने की घोषणा कर दी। इस बात से नाराज शिअद बादल के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। निदेशक पर हमले की कोशिश करने के साथ ही जूता उछाला गया। निदेशक ने डीएसजीएमसी के निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा सहित शिअद बादल के अन्य नेताओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज करा दी।

सिरसा को लेकर बादल व एसजीपीसी पर सवाल

मनजिंदर सिंह सिरसा के चुनाव हार जाने के बावजूद शिअद बादल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें डीएसजीएमसी अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी। इसके लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने उन्हें डीएसजीएमसी में अपना सदस्य मनोनित कर दिया। लेकिन, गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय ने पंजाबी नहीं आने को आधार बनाकर उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया। इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। वहीं, विरोधी पार्टियां एसजीपीसी पर बादल के दबाव में गलत तरीके से सिरसा को सदस्य मनोनित करने का आरोप लगाते हुए अदालत जाने की तैयारी कर रहे हैं।

गुरुद्वारा सिंह सभाओं की सूची

गुरुद्वारा सिंह सभाओं के अध्यक्षों में से डीएसजीएमसी के दो नामित सदस्य लाटरी से चुने जाते हैं। निदेशालय ने दो बार गुरुद्वारा सिंह सभाओं के अध्यक्षों की सूची जारी की, लेकिन नवनिर्वाचित सदस्य इससे संतुष्ट नहीं हैं। नौ सितंबर को विवाद होने के बाद संशोधित सूची जारी कर 24 सितंबर को बैठक बुलाई गई थी। दो की जगह पांच लोगों के नाम लाटरी से निकाले गए, लेकिन इनमें से चार को मृत बताया जा रहा है। इस वजह से दो नामित सदस्य घोषित नहीं हो सके।

दिल्ली सिख राजनीति के जानकार इंद्रमोहन सिंह का कहना है कि वर्ष 1974 के बाद से डीएसजीएमसी का यह आठवां चुनाव है, लेकिन इस तरह की स्थिति कभी नहीं हुई। अध्यक्ष के चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस तरह का विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे धार्मिक संस्था की बदनामी होती है।

Edited By: Prateek Kumar