नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। एक बार फिर ट्रामा सेंटर की चिकित्सीय सेवाओं को मुख्य परिसर में स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया है। जिससे ट्रामा सेंटर में फिर से कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा सके। वहीं कोरोना के हल्के लक्षण वाले डाक्टरों को भी ड्यूटी करने की छूट दी गई है।

मंगलवार को एम्स कोविड टास्क फोर्स की बैठक निदेशक डा. रणदीप गुलेरिया ने ली। जिसमें कई अहम फैसले लिए गए हैं। इनमें सभी विभागों को अलर्ट पर रहने की सलाह देते हुए रेजिडेंट डाक्टरों की अलग-अलग टीमें बनाने के आदेश दिए हैं। जिन डाक्टरों का रेजिडेंट कार्यकाल पूरा हुआ है अगर वे चाहें तो अपनी सेवाएं संस्थान को दे सकते हैं। लेकिन, उन्हें कोरोना मरीजों का इलाज करना होगा।

टास्क फोर्स के लिए बनेगी अलग टीम:टास्क फोर्स की बैठक अब सप्ताह में कम से कम दो बार होगी। वहीं, संक्रमित मरीजों और उनके होम आइसोलेशन में रहते हुए चिकित्सीय परामर्श देने के लिए भी कोविड टास्क फोर्स ने नियम बनाए हैं। इसके लिए अलग से डाक्टरों की एक टीम बनाने के लिए कहा गया है। यह टीम दिन भर मरीजों से फोन पर संपर्क में रहेगी। साथ ही उन्हें संक्रमण के उपचार आदि के बारे में सलाह देगी। इनके अलावा एम्स के न्यू प्राइवेट वार्ड में एक से 13 नंबर तक के कमरे खाली कराने के निर्देश जारी हुए हैं।

वहीं झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआइ) के दो तल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अधिकृत करने के भी निर्देश दिए गए हैं। यहां कोरोना मरीजों को भर्ती किया जाएगा।अभी 13 वेंटिलेटर पर भर्ती हैं मरीज:एक महीने पहले ही ट्रामा सेंटर में अन्य बीमारियों के मरीजों का इलाज शुरू हुआ था। लेकिन, अब बड़ी संख्या में कोरोना के मामले सामने आने से एम्स प्रबंधन ने तैयारी शुरू कर दी है। एक बार फिर ट्रामा सेंटर में सिर्फ कोरोना मरीजों का ही इलाज करने का निर्णय लिया गया है। अभी यहां 21 में से 13 वेंटिलेटर पर कोरोना मरीज भर्ती हैं।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari