नई दिल्ली [रणविजय सिंह ]। दिल्ली के रहने वाले 25 वर्षीय युवक की छाती से डाक्टरों ने 13.82 किलोग्राम का ट्यूमर निकालने में कामयाबी हासिल की है। गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट के डाक्टरों ने करीब ढ़ाई माह पहले चार घंटे की सर्जरी में यह ट्यूमर निकाला था। अस्पताल के डाक्टरों का दावा है कि किसी मरीज की छाती से निकाला गया यह अब तक का सबसे बड़ा ट्यूमर है। गनीमत है कि यह ट्यूमर कैंसर नहीं था। इससे पहले छाती में सबसे बड़े आकार का ट्यूमर गुजरात में एक मरीज के सीने से निकाला गया था जिसका वजन 9.5 किलोग्राम था।

सर्जरी के बाद पीड़ित मरीज देवेश शर्मा अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में अस्पताल के डाक्टरों ने यह जानकारी दी। डाक्टरों के अनुसार ट्यूमर इतना बड़ा था कि उनकी छाती में 90 फीसदी से अधिक जगह इस ट्यूमर ने घेर रखी थी। इस वजह से फेफड़ों की क्षमता 90 फीसदी घट गई थी। दोनों फेफड़े सिर्फ 10 फीसदी काम कर रहे थे। अस्पताल के कार्डियक सर्जरी विभाग के निदेशक डा. उद्गीथ धीर ने कहा कि देवेश को बहुत गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया था। वह ठीक से सांस नहीं ले पा रहे थे।

इस वजह से सांस की गति प्रति मिनट 34 थी। सर्जरी से करीब 20 दिन पहले से उन्हें परेशानी ज्यादा बढ़ गई थी और सीने में बेचैनी रहती थी। पीठ के बल सीधे लेटकर सो नहीं पाते थे। इस वजह से पेट के बल लेटना पड़ता था लेकिन मरीज को हल्के लक्षण बहुत पहले से थे। शुरुआत में मरीज को चलने पर हल्की सांस फूलने की परेशानी होती थी। डाक्टरों के अनुसार बीमारी होने से पहले देवेश जिम जाया करते थे और प्रोटीन सप्लीमेंट लिया करते थे। इस वजह से ट्यूमर बढ़ने के साथ छाती फूलने पर लगा कि जिम जाने के कारण मांसपेशियों में थोड़ा फैलाव आया है। ट्यूमर छाती में फैलने से फेफड़े व दिल पर दबाव पड़ रहा था।

सांस लेने में ज्यादा परेशानी होने पर वह सबसे पहले इलाज के लिए पल्मोनरी मेडिसिन के डाक्टर के पास गए। सीटी स्कैन जांच में ट्यूमर होने का पता चला। तब डाक्टर ने सर्जरी के लिए कार्डियक थोरेसिक सर्जन के पास स्थानांतरित किया। सभी जांच के बाद नौ अगस्त को डाक्टरों ने बड़ा चीरा लगाकर ट्यूमर को बाहर निकाला। इस दौरान छाती की मुख्य हड्डी को भी काटना पड़ा था। डा. उद्गीथ धीर ने कहा कि ट्यूमर के पूरे हिस्से को एक साथ निकाला गया। यह सर्जरी बहुत जटिल थी। सर्जरी के बाद आइसीयू में भर्ती करने के अगले दिन ही मरीज के शरीर से ट्यूब हटा दिया गया था लेकिन खून में कार्बन डाइआक्साइड का स्तर बढ़ने से फैफड़े दोबारा फैलने लगे। लिहाजा ट्यूब हटाने के 48 घंटे बाद मरीज को दोबारा वेंटिलेटर पर डालना पड़ा।

39 दिन बाद देवेश आइसीयू से बाहर निकल पाए। सर्जरी से पहले उनका वजन 82 किलोग्राम हो गया था। सर्जरी के बाद वजन घटकर 69 किलो रह गया था। देवेश ने कहा कि अब वह बिल्कुल ठीक महसूस कर रहे हैं। डा. उद्गीथ धीर ने कहा कि बायोप्सी जांच में पाया गया कि ट्यूमर थाइमोलिपोमा नामक बीमारी थी। ऐसे मामले में कीमो व रेडियोथेरेपी की जरूरत नहीं पड़ती। इस बीमारी से पीड़ित एक लाख से एक मरीज को दोबारा ट्यूमर होने की आशंका रहती है। इस बीमारी का कोई स्पष्ट कारण मालूम नहीं है। देवेश धूमपान भी नहीं करते लेकिन उनके पिता को फेफड़े का कैंसर था।

Edited By: Pradeep Chauhan