यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 15, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Delhi News: विदेश से मेडिकल पढ़े छात्रों के सामने इंटर्नशिप का संकट, भविष्य पर लटक रही तलवार
विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के सामने इंटर्नशिप का संकट बना हुआ है। विदेश से पढ़कर लौटे ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के सामने इंटर्नशिप का संकट बना हुआ है। इसका कारण यह है कि दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध सीट की तुलना में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई कर के आए दिल्ली के रहने वाले करीब चार गुना अधिक छात्रों ने इंटर्नशिप के लिए डीएमसी (दिल्ली मेडिकल काउंसिल) में आवेदन किया है।
अधर में छात्रों का भविष्य
इसलिए सभी छात्रों इंटर्नशिप मिल पाना मुश्किल है। इससे इससे छात्रों के भविष्य पर तलवार लटक रही है। इसके मद्देनजर दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को पत्र लिखकर इस समस्या की तरफ ध्यान आकर्षित कराया है और पिछले वर्ष की तरह दिल्ली के गैर शैक्षणिक अस्पतालों में इंटर्नशिप दिए जाने की सिफारिश की है। ताकि सभी छात्रों को इंटर्नशिप मिल सके।
डीएमसी ने अपने पत्र में कहा है कि एनबीई (नेशनल बोर्ड आफ एग्जामिनेशन) ने विदेश से मेडिकल पढ़े छात्रों की परीक्षा का परिणाम फरवरी में घोषित किया था। यह परीक्षा पास करने वाले करीब एक हजार छात्र दिल्ली में इंटर्नशिप करना चाहते हैं। डीएमसी में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करके आए दिल्ली के रहने वाले 230 छात्रों ने इंटर्नशिप के लिए आवेदन दिया है। इन छात्रों आवेदन के साथ दिल्ली का आधार कार्ड या पासपोर्ट संलग्न किया है।
दिल्ली के कॉलेजों में 60 सीटें
डीएमसी के रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी ने दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों ने विदेश से मेडिकल पढ़े छात्रों के इंटर्नशिप के लिए 60 सीटें उपलब्ध होने की जानकारी दी है। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) व आरएमएल अस्पताल ने उपलब्ध सीटों की जानकारी डीएमसी को नहीं भेजी है। डॉ. गिरीश त्यागी ने कहा कि एमएएमसी और आरएमएल के मेडिकल कालेज को पांच-छह बार पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन इन दोनों संस्थानों ने उपलब्ध सीटों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है।
विदेश से पढ़कर लौटे एनसीआर में रहने वाले छात्र भी दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप करना चाहते हैं, क्योंकि एनसीआर के शहरों में ज्यादा मेडिकल कॉलेज नहीं हैं। राष्ट्रीय राजधानी के मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध सीटों की तुलना में आवेदन अधिक आने से दिल्ली के सभी छात्रों को ही इंटर्नशिप के लिए सीटें उपलब्ध कराना मुश्किल है।
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उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी ऐसी समस्या उत्पन्न हुई थी। एनएमसी ने दिल्ली के गैर शैक्षणिक सरकारी व निजी क्षेत्र के आधा दर्जन अस्पतालों में विदेश से मेडिकल पढ़े छात्रों के एक वर्ष इंटर्नशिप की स्वीकृति दी थी। इससे करीब 400 छात्रों को इंटर्नशिप का मौका मिल पाया था। मौजूदा सत्र के छात्रों के लिए यह आदेश प्रभावी नहीं है। मौजूदा स्थिति के मद्देनजर इस बार भी गैर शैक्षणिक अस्पतालों में इंटर्नशिप का प्रविधान किया जाना चाहिए।
