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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 23, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Delhi Crime :एमटेक छात्र ने तेज रफ्तार कार से सड़क पार कर रहे मां-बेटे को कुचला, मौत

By Pradeep ChauhanEdited By:
Published: Tue, 23 Nov 2021 02:46 PM (IST)

Delhi Crime सरिता विहार थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार कार ने पैदल सड़क पार कर रहे मां-बेटे को टक्कर मार ...और पढ़ें

Delhi Crime :टक्कर से घायल मां-बेटे को नजदीकी अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों की मौत हो गई।
Delhi Crime :टक्कर से घायल मां-बेटे को नजदीकी अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों की मौत हो गई।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। सरिता विहार थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार कार ने पैदल सड़क पार कर रहे मां-बेटे को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों सड़क पर कई फीट दूर उछलकर जा गिरे। राहगीरों ने दोनों को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी मौत हो गई। मृतकों की पहचान राहिला उर्फ नसीमा खातून और उसके आठ वर्षीय बेटे इलैमुल हुसैन के रूप में की गई है।

वहीं आरोपित कार चालक की पहचान निष्कर्ष सक्सेना के रूप में हुई है। आरोपित नोएडा के एक निजी कालेज से पढ़ाई कर रहा है। जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर में एक बजे कालिंदी कुंज से मथुरा रोड जाने वाली सड़क पर नसीमा खातून बेटे के साथ सड़क पार कर रही थीं। इस दौरान कालिंदी कुंज की तरफ से आइ तेज रफ्तार आइ-10 कार ने उन्हें टक्कर मार दी। टक्कर लगने से घायल मां-बेटे को नजदीकी अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों की मौत हो गई।

पुलिस ने घटना स्थल के पास से ही कार जब्त कर आरोपित युवक निष्कर्ष सक्सेना को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूछताछ में आरोपित ने बताया कि वह नोएडा के एक निजी कालेज से एमटेक की पढ़ाई कर रहा है। वह नोएडा से वापस अपने घर जा रहा था तभी एशिया पेसिफिक माल के सामने की सड़क पर हादसा हो गया। पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से गाड़ी चलाने की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।

परिवार में बचे पिता-बेटी

जानकारी के अनुसार मृतका नसीमा के परिवार में उसके पति और तीन बेटे और एक बेटी थी। सड़क दुर्घटना के कुछ समय पहले ही उसके दो बेटों की पीलिया की वजह से निधन हो गया था। वहीं नसीमा और एक अन्य बेटे की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। अब परिवार में केवल मोहम्मद गुलाम रसूल और उनकी छोटी बेटी ही बची है। गुलाम रसूल पास की एक मस्जिद में देखरेख करने का काम करते हैं, जिससे उनके घर का गुजारा होता था।