नई दिल्ली, आशीष गुप्ता। दिल्ली दंगे के दौरान दयालपुर इलाके में युवक की हत्या के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के कोर्ट ने सात आरोपितों पर हत्या, गैर कानूनी समूह बनाने, उपद्रव करने, घातक हथियारों का उपयोग करने और साजिश रचने का आरोप तय किया है। इनमें से सिर्फ दो आरोपितों पर चोरी का आरोप तय किया गया है। सभी आरोपितों ने खुद को बेकसूर बताते हुए ट्रायल की मांग की है।

गत वर्ष 25 फरवरी को दयालपुर इलाके में यमुना विहार बस स्टैंड के पास समयपुर बादली स्थित राजीव विहार कालोनी में रहने वाले युवक मोनिश की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ब्रजपुरी निवासी अरुण कुमार उर्फ मुन्ना, अमन कश्यप, आशीष उर्फ गोली, प्रदीप राय, देवेंद्र कुमार, मौजपुर विजय पार्क निवासी कृष्ण कांत धीमान और राहुल भारद्वाज को आरोपित बनाया था। आरोपितों के वकील ने कोर्ट में पक्ष रखा कि सातों लोगों पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। उनके खिलाफ झूठे गवाह पेश किए गए हैं। सातों लाेगों के खिलाफ कोई वीडियो भी नहीं है।

वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि इस मामले में गवाह के रूप में पेश किए गए व्यक्ति ने घटना के दिन पुलिस कंट्रोल रूम को कई काल किए थे। गवाह ने आरोपितों की पहचान की है। घटना में इस्तेमाल तलवारें आरोपित अमन कश्यप, अरुण कुमार और प्रदीप राय के घर से बरामद हुई हैं। आरोपित कृष्ण कांत धीमान और राहुल उपाध्याय ने मृतक का मोबाइल चोरी कर एक व्यक्ति को बेच दिया था, जोकि बरामद किया जा चुका है।

दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर कोर्ट ने सातों आरोपितों पर हत्या, गैर कानूनी समूह बनाने, उपद्रव करने, घातक हथियारों का उपयोग करने और साजिश रचने का आरोप तय किया। चोरी का आरोप आरोपित कृष्ण कांत धीमान और राहुल उपाध्याय पर तय किया। कोर्ट ने कहा कि चश्मदीद गवाह सबसे अच्छा सबूत माना जाता है, जब तक कि उस पर संदेह करने के लिए मजबूत कारण न हो। इस मामले में चश्मदीद गवाह कोई बुत नहीं था। उसने पुलिस कंट्रोल रूम को काल किया था। जिससे प्रमाणित होता है कि वह मौके पर था।

 

Edited By: Prateek Kumar