नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली दंगे के दौरान वेलकम इलाके में व्यक्ति की हत्या करने के मामले में सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक आरोपित को जमानत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने आदेश में कहा कि आरोपित आसिफ पर लगे आरोप गंभीर हैं। वह अन्य कई मामलों में आरोपित है। ऐसे में उसे जमानत देना उचित नहीं।

गत वर्ष 25 फरवरी को दंगे के दौरान मुख्य मौजपुर रोड पर एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। शुरुआत में मृतक की पहचान नहीं हो पाई थी। बाद में जांच के दौरान मृतक की पहचान ब्रजपुरी निवासी प्रेम सिंह के रूप में हुई थी। उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला था कि चाकू से गोद कर उनकी हत्या की गई थी। इस मामले में आरोपित आसिफ की जमानत अर्जी पर सोमवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की कोर्ट में सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने झूठे मामले में फंसाने की दलील पेश करते हुए कहा कि इस केस में कोई चश्मदीद गवाह नहीं है।

अभियोजन पक्ष ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आसिफ इस केस के अलावा 18 मामलों में आरोपित है। इसमें से तीन मामले आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज हैं। कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपित से पूछताछ की गई थी। जिसमें उसने बयान दिया था कि उसके समुदाय के लोग नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का विरोध कर रहे थे।

जबकि अन्य समुदाय के लोग सीएए और एनसीआर के समर्थन में सड़क पर उतरे हुए थे। उनको सबक सिखाने के लिए यमुना विहार, मुख्य मौजपुर रोड, विजय पार्क में लाठी, डंडे, तलवारों से हमला किया गया था। कई गवाहों के बयान भी अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के सामने रखे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपित आसिफ की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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