नई दिल्ली, जागरण स्पेशल। पूरे वर्ष जिस काम को थोड़ा-थोड़ा करके किया गया, उसे लेकर अब अचानक से तेजी दिखाई जा रही है। स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने किरायेदारों के सत्यापन के कार्य को अचानक तेज कर दिया है। हर थाने के पुलिसकर्मी अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर किरायेदारों के सत्यापन के कार्य को पूरा कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि किरायेदारों के सत्यापन की कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन सामान्य दिनों में यह मकान मालिक की जिम्मेदारी होती है कि वह घर में किरायेदार रखने से पहले उसका सत्यापन कराए। हालांकि काफी कम संख्या में लोग इतने जागरूक हैं कि वे सत्यापन के कार्य को गंभीरता से लेते हैं, वहीं स्वतंत्रता दिवस पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के लिए दिल्ली पुलिस ने पूरी राजधानी में सत्यापन का बिगुल फूंक दिया है। हर थाने और चौकी के पुलिसकर्मी दिन का ज्यादातर समय किरायेदारों के सत्यापन में ही लगा रहे हैं।

टूटे शीशे और पिस्टल ने खड़े किए सवाल

कार की खिड़की के टूटे हुए शीशे ने एक-एक करके कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अब तक इनके जवाब किसी के पास नहीं हैं। सिर्फ यह कहा जा रहा है कि जांच चल रही है। लावारिस हालत में मिली कार लूट में प्रयोग की गई। घटना के दो घंटे बाद कार थाना पुलिस के बजाय पीसीआर कर्मियों को मिलती है। ऐसे में घटनास्थल के आसपास थाना पुलिस की ओर से कार की तलाश पर सवाल खड़ा होता है। जिस कार का प्रयोग लूट में किया गया, उसकी खिड़की का शीशा किसने और क्यों तोड़ा। बदमाश यूएसए में बनी पिस्टल क्यों छोड़ गए। लूट के दौरान प्रयोग किया गया मोबाइल भी कार में ही पीसीआर कर्मियों को मिलता है। ऐसे में बदमाशों की कार का लावारिस हालत में मिलना, विदेशी पिस्टल और मोबाइल का कार में मिलना इस समय पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है।

नौकरी जैसा ही है यमुना पुल पर बैठना

यमुना पर आइटीओ के पास विकास मार्ग पर बना पुल वैसे तो यमुना को पार करने का जरिया है, लेकिन यह पुल कुछ लोगों के लिए घर चलाने का जरिया भी बना हुआ है। यहां भी काम दो तरह से हो रहा है। एक तरफ लोग यहां फल बेचते हैं और जहां-जहां से यमुना पुल पर लगी ग्रिल टूटी हुई है, वहां बच्चे बैठे रहते हैं। इन बच्चों से जब वहां बैठने की वजह पूछी तो बताया कि जब लोग पुल पर रुककर यमुना में पूजन व हवन के बाद बची सामग्री के अलावा अन्य कूड़ा फेंकते हैं तो ये बच्चे उनसे दक्षिणा के रूप में कुछ पैसे लेते हैं। ये रोज टूटी हुई ग्रिल पर इस तरह से बैठते हैं जैसे यहां इनकी नौकरी लगी हुई है। बच्चों का कहना है कि इनके घर वाले यहीं फल बेचते हैं तो ये पुल पर उनके पास रहते हैं और कुछ कमाई भी कर लेते हैं।

अब अतिक्रमण हटाने में भी मुस्तैदी दिखा रही पुलिस

अब तक जिस काम के लिए पुलिस और दूसरे विभाग एक दूसरे को जिम्मेदार बताते थे, उसे लेकर अब पुलिस भी संजीदा हो गई है और संबंधित विभाग भी गंभीरता दिखा रहा है। बात की जा रही है सड़क किनारे होने वाले अस्थायी अतिक्रमण की। रेहड़ी-ठेली, पटरी और दुकानदार फुटपाथ से लेकर सड़क पर सामान फैलाकर जहां पैदल लोगों के लिए समस्या खड़ी करते हैं, वहीं यह जाम का कारण भी बनता है। इस समय शारीरिक दूरी का पालन कराने के लिए पुलिस ने जो मुस्तैदी दिखाई है, उसी कड़ी में पुलिस अब अतिक्रमण को लेकर भी संजीदगी दिखा रही है। आलम यह है कि अब स्थानीय थाने के पुलिसकर्मी अपने साथ विभिन्न बलों के जवानों को लेकर अपने इलाके में निकल रहे हैं और जहां भी फुटपाथ पर अतिक्रमण दिखाई दे रहा है, उसे हटवाया जा रहा है। कई जगह सामान जब्त करने का कार्य भी किया गया है।

 

Posted By: JP Yadav

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