नई दिल्ली [रणविजय सिंह]। मेट्रो ट्रेन में बैठने वालों की संख्या तो बढ़ा दी गई है, पर स्टेशनों में प्रवेश के अभी भी सीमित द्वार खोले जा रहे हैं। इसके चलते बाहर लंबी लाइनें लग जा रही हैं। व्यस्त समय में स्टेशनों में प्रवेश के लिए आधे से एक घंटे लग रहे हैं। इसके चलते किसी स्टेशनों के बाहर अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो रही है तो अधिकतर स्टेशनों पर भीड़ के चलते कोरोना दिशानिर्देशों का पालन नहीं हो पा रहा है।

स्टेशनों में प्रवेश के लिए एक ही गेट खुल रहे, ऐसे में बाहर लग जा रही हैं लंबी लाइनें

हाल ही में दिल्ली मेट्रो रेल काॅरपोरेशन (डीएमआरसी) ने सभी सीटों पर यात्रियों को बैठने की मंजूरी दी है, पर गेटों की व्यवस्था यथावत रखी है। दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन, भागीरथ पैलेस के अध्यक्ष आशीष ग्रोवर ने कहा कि मेट्रो में बैठने की संख्या तो बढ़ा दी गई है पर प्रवेश द्वारों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है। इसके चलते स्टेशनों में प्रवेश को लेकर मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि खुले हुए गेटों पर प्रवेश के लिए लोगों का दबाव दोगुना से अधिक हो गया है। स्थिति यह है कि व्यस्त समय में चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन में प्रवेश के लिए आधे किमी से अधिक की लाइन लग जा रही है। लोग एक-दूसरे पर गिरे जा रहे हैं।

कारोबारी संगठनों और यात्रियों ने मेट्रो के और गेट खोलने की मांग की

मेट्रो स्टेशन के भीतर प्रवेश में एक घंटे से अधिक लग जा रहे हैं। यह काफी खराब स्थिति है। इसके चलते कोरोना दिशानिर्देशों का पालन भी नहीं हो रहा है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, दिल्ली के महासचिव हेमंत गुप्ता ने मांग करते हुए कहा कि मेट्रो स्टेशनों के जितने अधिक गेट खुलेंगे, उतनी ही बाहर भीड़ कम होगी। इससे लोगों को सहूलियत होगी। अधिक संख्या में लोग बाजारों में आने की सोचेंगे। इससे बाजारों का कारोबार बढ़ेगा।

खुलने चाहिए सभी प्रवेश द्वार

छात्र अपूर्वा नोएडा से दिल्ली की यात्रा रोजाना करती हैं। उन्होंने कहा कि नोएडा से दिल्ली आना तो आसान होता है। पर जाना उतना ही मुश्किल, क्योंकि शाम के वक्त मेट्रो स्टेशन में प्रवेश के लिए लड़कियों की लाइनें भी काफी अधिक होती है। पुरुषों की लाइन तो उससे भी कहीं अधिक होती है। इसलिए प्रवेश के लिए सभी द्वार खोले जाने चाहिए। इस संबंध में मेट्रो प्रवक्ता ने कहा कि मेट्रो ट्रेनों के भीतर भीड़ कम रखने के लिए और कोरोना दिशानिर्देशों के पालन के लिए प्रवेश के द्वार सीमित किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त तक वैसे भी इस व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा। उसके बाद परिस्थितियों को देखते हुए विचार किया जा सकता है।

Edited By: Prateek Kumar