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Delhi: हत्या के मामले में 6 अभियुक्तों की उम्रकैद की सजा HC ने रखी बरकरार, हस्तक्षेप से इनकार

जस्टिस मुक्ता गुप्ता और पूनम ए बंबा की पीठ ने छह दोषियों द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया जिसमें ट्रायल कोर्ट के जून 2017 के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि सभी के खिलाफ संदेह से परे मामला साबित हुआ है

By Jagran NewsEdited By: Narender SanwariyaPublished: Thu, 23 Mar 2023 02:39 AM (IST)Updated: Thu, 23 Mar 2023 02:39 AM (IST)
हत्या के मामले में 6 अभियुक्तों की उम्रकैद की सजा HC ने रखी बरकरार

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। निजी दुश्मनी में वर्ष 2010 में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या करने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने छह लोगों की उम्रकैद की सजा को बुधवार को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और पूनम ए बंबा की पीठ ने दोषियों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि सभी के खिलाफ संदेह से परे मामला साबित हुआ है और निचली अदालत के निर्णय में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं है।

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जून 2017 में सजा सुनाने के निचली अदालत के निर्णय को अभियुक्तों ने चुनौती दी थी।अदालत ने दोषी विनोद, विक्की, चंदर प्रकाश, अनिल, विजय और महेश को उम्र कैद की सजा बरकरार रखी। अभियोजन पक्ष के अनुसार 27 नवंबर 2010 को दोषियों ने उत्तम नगर के हस्तसाल गांव में पीड़ित सोनू को पकड़कर उस पर गोलियां बरसा दी थी। सोनू को डीडीयू अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया था।दोनों परिवार के बीच झगड़ा के कारण दोषियों ने वारदात को अंजाम दिया था।

बता दें कि जस्टिस मुक्ता गुप्ता और पूनम ए बंबा की पीठ ने छह दोषियों द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट के जून 2017 के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के नेतृत्व में सबूतों पर विचार करते हुए, अदालत ने पाया कि यह अपीलकर्ताओं (दोषियों) के अपराध को उचित संदेह से परे साबित करता है। अपील तदनुसार खारिज की जाती है।

हाईकोर्ट ने हत्या के आरोप में विनोद, विक्की, चंदर प्रकाश, अनिल, विजय और महेश को उम्र कैद की सजा बरकरार रखी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 27 नवंबर 2010 को हुई थी जब छह लोगों ने पीड़ित सोनू को पकड़ा और पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर के हस्तसाल गांव में उस पर गोलियां बरसाईं। सोनू का भाई सनी और दोस्त बंटी मौके से भाग गए और हमलावरों के जाने के कुछ देर बाद ही मौके पर लौटे और पीड़िता को डीडीयू अस्पताल ले गए जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

सन्नी ने पुलिस को बताया था कि आरोपी विजय के परिवार की उसके परिवार से पुरानी दुश्मनी थी और दोनों परिवारों के बीच पहले भी झगड़ा हो चुका था। दोषियों ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को इस आधार पर चुनौती दी कि अभियोजन पक्ष की कहानी दो चश्मदीद गवाहों के बयान पर निर्भर करती है, जिनकी घटनास्थल पर उपस्थिति संदिग्ध थी और उनकी गवाही अविश्वसनीय थी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि दो चश्मदीद गवाहों के साक्ष्य को अपीलकर्ताओं ने इस तर्क के साथ चुनौती दी है कि उनका आचरण अप्राकृतिक था क्योंकि जब गोली चलाई गई थी तब वे भाग गए थे। जबकि अभियोजन पक्ष का मामला यह है कि अन्य अभियुक्तों द्वारा सोनू को पकड़ने के बाद, चंदर प्रकाश और विजय ने बंदूक की गोली मारी।


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