नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। Delhi News: लूट, हत्या, हत्या का प्रयास समेत अन्य धाराओं के तहत निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराने के निचली अदालत के निर्णय को दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है। आरोपितों की पहचान में घायल पीड़िता इंद्रप्रभा को अस्पष्ट बताने के अपीलकर्ता के तर्क को ठुकराते हुए न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता व अनीश दयाल की पीठ ने कहा कि इंद्रप्रभा अपनी गवाही में पूरी तरह से स्पष्ट थीं क्योंकि उन्होंने अपीलकर्ता राजकुमार उर्फ भीमा की पहचान की थी, जोकि पांच आरोपितों में से एक था।

फरवरी 2021 में सुनाई गई सजा काे चुनौती देने वाली याचिका निरस्त करते हुए पीठ ने यह भी कहा कि घटनास्थल से अपीलकर्ता के अंगुलियों के निशान न मिलने से वह अपराध में शामिल होने के आरोप से मुक्त नहीं हो जाता है क्योंकि पीड़िता की गवाही उसकी मौजूदगी साबित हुई है। इतना ही नहीं डा. अरविंद कुमार ने अपनी गवाही में कहा कि दोषी के पास से मिले हथियारों में एक छेनी थी और पीड़ितों के शरीर पर मिले चोट के निशान इसी हथियार से हमले के होने की संभावना है।

इसके साथ ही घटना के दिन दोषी ने जो पैंट पहनी थी उस पर मानव खून के निशान मिले थे। इस संबंध में अपीलकर्ता की तरफ कोई जवाब नहीं दिया गया कि खून कैसे आया। अभियोजन दोषी के खिलाफ संदेह से परे मामले को साबित करने में कामयाब रहा है। अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि मामले में आरोपित अन्य चार को निचली अदालत ने बरी कर दिया था। उसने कहा कि पुलिस ने उसके खिलाफ सिर्फ इसलिए मामला दर्ज किया वह आदतन अपराधी है।

उसने कहा कि पीड़िता ने एक आरोपित को यह कहते हुए न पहचान पाने की बात की थी कि घटना आठ साल पुरानी है। बुजुर्ग अधिशासी अभियंता की कर दी थी हत्या याचिका के अनुसार तीन नवंबर 2008 को मिली सूचना पर जब देर रात एक बजकर 50 मिनट पर पुलिस सुखदेव विहार पहुंची तो 85 वर्षीय बुजुर्ग का शव जमीन पर मिला। वहीं, दर्द से कराह रही पीड़िता इंद्रप्रभा खून से लतपथ मिलीं।

इंद्रप्रभा दिल्ली सरकार से सेवानिवृत्त थी, जबकि उनके पति रेलवे से अधिशासी अभियंता के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका बेटा और बेटी अमेरिका में रहते थे। उन्होंने गवाही दी थी कि घटना के दिन दोषी समेत तीन चार बदमाश उनके घर में घुस आए थे। बदमाशों ने उनको व उनके पति को बुरी तरह से मारा।

बरामदे में गिरने पर बदमाश उनको कमरे में खींचकर लाए और उनकी अलमीरा से कैश, गहने लेकर फरार हो गए। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दोषी राजकुमार को मकोका व डकैती, लूट, हत्या, हत्या का प्रयास समेत अन्य धाराओं में 20 फरवरी 2021 को उम्रकैद की सजा और पांच हजार का जुर्माना लगाया था। जुर्माना राशि न जमा करने पर एक महीने की सजा और भुगतने का निर्देश दिया था।

Edited By: Vinay Kumar Tiwari

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