यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 22, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Delhi Riots 2020: दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी- प्रथम दृष्टया स्वीकार्य नहीं है उमर खालिद का आपत्तिजनक भाषण
Umar Khalid News दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की ...और पढ़ें

नई दिल्ली [विनीत त्रिपाठी]। दिल्ली दंगा मामले में साजिश रचने के लिए आरोपित बनाए गए उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि महाराष्ट्र के अमरावती में खालिद द्वारा दिया गया भाषण आपत्तिजनक था और प्रथम दृष्टया यह स्वीकार्य नहीं है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा कि भाषण आपत्तिजनक और अप्रिय है।
पीठ ने पूछा क्या आपको नहीं लगता कि इस्तेमाल किए गए ये भाव लोगों के लिए अपमानजनक हैं? यह लगभग ऐसा है जैसे कि भारत की आजादी की लड़ाई केवल एक समुदाय ने लड़ी थी। पीठ ने सवाल उठाया कि क्या गांधीजी या शहीद भगत सिंहजी ने कभी इस भाषा का इस्तेमाल किया था?
पीठ ने कहा कि हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अनुमति देने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन आप क्या कह रहे हैं? पीठ ने उक्त टिप्पणी तब की जब खालिद की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने खालिद के भाषण का एक हिस्सा अदालत के समक्ष पढ़ा।
पीठ ने जब पूछा कि खालिद पर क्या आरोप है। इसके जवाब में खालिद की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पेस ने दलील दी कि खालिद पर साजिश का आरोप लगाया गया है, लेकिन वह शहर में मौजूद नहीं था।हालांकि, पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया अदालत कह सकती है कि खालिद द्वारा दिया गया भाषण स्वीकार्य नहीं है।
उक्त मौखिल टिप्पणियां करते हुए पीठ ने खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिका पर अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।
19 महीने से जेल में बंद उमर खालिद ने 24 मार्च को जमानत देने से इन्कार करने के कड़कड़डूमा कोर्ट के निर्णय को दिल्ली हाई काेर्ट में चुनौती दी है। फरवरी-2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगा मामले में खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में है।
