नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिवेंद्र मोहन सिंह को निचली अदालत द्वारा जमानत दिये जाने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को रद कर दिया। न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की पीठ ने कहा कि साजिश रचने का पता लगाने के लिए शिवेंद्र सिंह काे हिरासत में लिया जाना अनिवार्य है, ताकि गबन की गई धनराशि का पता लगाया जा रहा है। पीठ ने यह आदेश तीन मार्च को शिवेंद्र सिंह को जमानत देने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड की याचिका पर दिया।

आएफएल की याचिका काे स्वीकार करते हुए पीठ ने कहा कि इतनी बड़ी रकम के धोखाधड़ी के मामले में शिविंदर को जमानत देने का असर न सिर्फ बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करता है, बल्कि मामले की जांच पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी वजह से लोग आपराधिक वारदातों को दोहराते हैं। जमानत देने के आदेश को रद करते हुए पीठ ने मुझे यह मानने में कोई संकोच नहीं है कि निचली अदालत का आदेश गंभीर दुर्बलताओं से ग्रस्त है। पीठ ने कहा कि इस मामले में साजिश का पता लगाने के साथ ही गबन की गई धनराशि को तलाशने के लिए भी आरोपित को हिरासत में लिए जाने की जरूरत है।

दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू ने मार्च 2019 में आरएफएल के मनप्रीत सुरी की तरफ से शिविंदर मोहन सिंह, रेलिगेर इंटरप्राइजेज लिमिटेड के सुनील गोधवानल और आरएफएल के पूर्व सीईओ कवि अरोड़ा समेत अन्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी। आरोप था कि इन लोगों ने फर्म में काम करते हुए लोन लिया, लेकिन लोन के रूप में ली गई धनराशि का अन्य कंपनियों में निवेश किया गया।

Edited By: Mangal Yadav