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दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे दिव्यांगों की होगी पहचान, मिलेंगी जरूरी सुविधाएं

शिक्षा निदेशालय ने कहा कि स्थानीय प्राधिकारी दिव्यांग बच्चों की पहचान करने उनकी विशेष जरूरतों का पता लगाने और इन जरूरतों को किस हद तक पूरा किया जा रहा है इसके लिए हर पांच साल में स्कूल जाने वाले बच्चों का सर्वेक्षण करेंगे। पहली से 11वीं तक सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग प्रशस्त एप के माध्यम से की जाएगी।

By Ritika Mishra Edited By: Abhishek Tiwari Published: Sun, 09 Jun 2024 03:36 PM (IST)Updated: Sun, 09 Jun 2024 03:36 PM (IST)
दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे दिव्यांगों की होगी पहचान, मिलेंगी जरूरी सुविधाएं

रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। शिक्षा निदेशालय राजधानी के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी दिव्यांग विद्यार्थियों की चिह्नित करने का कार्य करेगा ताकि उनको सभी जरूरी मदद और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

निदेशालय ने कहा कि स्थानीय प्राधिकारी दिव्यांग बच्चों की पहचान करने, उनकी विशेष जरूरतों का पता लगाने और इन जरूरतों को किस हद तक पूरा किया जा रहा है, इसके लिए हर पांच साल में स्कूल जाने वाले बच्चों का सर्वेक्षण करेंगे।

निदेशालय ने निर्देश दिया कि जांच के लिए प्रशस्त जांच चेकलिस्ट का उपयोग करेंगे। निदेशालय ने कहा कि इस शैक्षणिक वर्ष के लिए स्कूल में कुल नामांकन में से कम से कम तीन प्रतिशत दिव्यांग छात्रों की पहचान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

निदेशालय ने निर्देश दिया कि कक्षा शिक्षकों, विषय शिक्षकों, विशेष शिक्षा शिक्षकों के लिए प्रशस्त स्क्रीनिंग चेकलिस्ट और प्रशस्त मोबाइल एप के उपयोग पर अभिविन्यास कार्यक्रम प्रत्येक स्कूल में स्कूल के नियमित काम में बाधा डाले बिना आयोजित किया जाएगा।

वहीं, सभी कक्षा, विषय व विशेष शिक्षा शिक्षकों के लिए अपने टेबलेट और मोबाइल में प्रशस्त मोबाइल एप डाउनलोड करना अनिवार्य है। स्क्रीनिंग के लिए संबंधित शिक्षकों द्वारा प्रशस्त मोबाइल एप का उपयोग किया जाएगा। वहीं, पहली से 11वीं तक सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग प्रशस्त एप के माध्यम से की जाएगी।

सभी स्कूलों को 26 जुलाई तक पूरी करनी होगी जांच

स्क्रीनिंग के बाद स्कूल स्तर पर रिकॉर्ड बनाए रखा जाएगा। कक्षा अध्यापक प्रशस्त के माध्यम से स्क्रीनिंग के बाद संदिग्ध दिव्यांग विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड भी बनाए रखेंगे। दिव्यांग बच्चों की स्कूल स्तर पर जांच सभी स्कूलों को 26 जुलाई तक पूरी करनी होगी। स्कूल स्तर पर समावेशी शिक्षा के अंतर्गत हस्तक्षेपों को संदिग्ध दिव्यांग बच्चों तक बढ़ाया जाएगा।

निदेशालय ने कहा कि प्रधानाचार्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि विशेष शिक्षा शिक्षकों को जिला स्तरीय वर्चुअल प्रशिक्षण प्राप्त करने के तुरंत बाद सभी कक्षा शिक्षकों और विषय शिक्षकों के लिए अपने-अपने स्कूल में दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों में बाधा डाले बिना प्रशस्त मोबाइल एप पर प्रशिक्षण आयोजित किया जाए।

निदेशालय के अधिकारी ने बताया कि प्रशस्त चेकलिस्ट को विद्यार्थियों की प्रारंभिक जांच के लिए दो भागों में विभाजित किया गया है। प्रशस्त भाग-1 का उपयोग विषय और कक्षा शिक्षकों द्वारा प्रथम स्तर की जांच के लिए किया जाता है। प्रशस्त भाग-2 का उपयोग विशेष शिक्षा शिक्षकों द्वारा द्वितीय स्तर की जांच और दिव्यांगता की अस्थायी सूची बनाने के लिए किया जाता है।

निदेशालय ने कहा कि प्रधानाचार्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि स्क्रीनिंग और पहचान की प्रक्रिया के दौरान विशेष शिक्षा शिक्षकों को कोई अतिरिक्त कार्य आवंटित नहीं किया जाता है। स्क्रीनिंग और पहचान प्रक्रिया 26 जुलाई तक पूरी की जानी चाहिए और डाटा को 31 जुलाई तक उप शिक्षा निदेशक (जोन) के माध्यम से संबंधित जिला समन्वयक को प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

वहीं, जांचे गए छात्रों से संबंधित जानकारी गोपनीय रखनी होगी और इसे केवल संबंधित माता-पिता, अभिभावकों और अधिकृत कर्मियों के साथ साझा किया जाना चाहिए।


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