नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली दंगे की साजिश रचने के आरोप में गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में चल रहे सभी आरोपितों को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के दौरान पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा है कि आरोपितों के वकील कोर्ट में शारीरिक रूप से पेश होकर पक्ष रखेंगे। कोर्ट ने आरोपित पूर्व पार्षद इशरत जहां की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 8 अप्रैल को निर्धारित है।

आरोपित इशरत जहां ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की कोर्ट में अर्जी दायर की थी। जिसमें उसने जेल से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये पेश होने की इजाजत मांगी थी। सोमवार को कोर्ट ने उसकी अर्जी स्वीकार करते हुए जेल प्रशासन को निर्देश जारी कर दिया कि इशरत जहां को अगली सुनवाई से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये ही पेश किया जाए।

इस मामले में न्यायिक हिरासत में जेल में बंद आरोपित देवांगना कलीता और नताशा नरवाल को पहले से आनलाइन माध्यम से पेश किया जा रहा है। इस पर गौर करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले में न्यायिक हिरासत में चल रहे अन्य आरोपितों को भी वीडियो कान्फ्रेंसिंग से ही पेश किया जाए।

न्यायिक हिरासत में ताहिर समेत 16 आरोपित

इस मामले में दंगे के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन, जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, जेएनयू छात्र शरजील इमाम समेत 16 आरोपित न्यायिक हिरासत में हैं। आरोपित सफूरा जरगर जमानत पर है। एक आरोपित फैजान के खिलाफ कोर्ट ने गैर जमानती वांटर जारी कर रखा है। पिछली बार उमर खालिद ने सुनवाई पर लाते वक्त कड़ी सुरक्षा की मांग की थी। बात दें कि दंगे में नाम आने के बाद से ताहिर हुसैन को आप निलंबित कर चुकी है।

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