नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। दिल्ली हाई कोर्ट के एस ब्लाक (दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिटेशन सेंटर) भवन के उद्घाटन करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को कहा कि भारत राजधानी दिल्ली के बाहर भी है और देश को आगे बढ़ाने के लिए जिला न्यायपालिका पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच के अधिकार को वास्तविक बनाने का एक महत्वपूर्ण घटक यह सुनिश्चित करना है कि देश में पर्याप्त न्यायिक बुनियादी ढांचा हो और इसमें भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचा और कर्मियों की ताकत शामिल है।

कार्यक्रम में शामिल हुए कई मंत्री 

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, उपराज्यपाल वीके सक्सेना, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय के कौल, दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा मौजूद रहे।

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि औपनिवेशिक शासन के दौरान बनाए गए अदालत परिसरों का उद्देश्य वादियों के बीच भय की भावना पैदा करना था, लेकिन आज ऐसा नहीं है। जिला अदालतों का वास्तव में आम नागरिकों के जीवन में तत्काल प्रभाव पड़ता है। अपने दैनिक जीवन की समस्याओं का समाधान तलाशने के लिए जिला अदालतों में संकटग्रस्त लोग आते हैं। वास्तव में जिला न्यायपालिका का असली चेहरा है, जिसे हमें हल करने की आवश्यकता है।

आम नागरिकों को तेजी से मिले न्याय

इस दौरान उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि आम नागरिक को तेजी से न्याय मिले और यह बिना मूलभूत सुविधा के संभव नहीं है। बेकार मूलभूत ढांचा देरी से न्याय मिलने का कारण है। इस दिशा में हर संभव प्रयास आगे भी किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि हम पहले से ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और इसका मतलब है कि शासन का पूरा ढांचा साथ-साथ चलना है और यह होगा। न्याय बहुत महत्वपूर्ण है।आपके पास बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए।

पेपरलेस होने जा रही है भारतीय न्याय व्यवस्था

इस माैके पर केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि जब हम न्यायपालिका के बारे में बात करते हैं जो पूरी तरह से डिजिटल है। देश भर की अदालतों में पांच करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं और मेरे लिए इस मुद्दे पर जवाब देना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में देशभर में हाई कोर्ट व निचली अदालत में मूलभूत सुविधाएं बढ़ाना जरूरी है। मैं इस अवसर पर कहना चाहता हूं कि आने वे समय मे भारतीय न्याय व्यवस्था पेपरलेस होने जा रही है और इसके लिए वकीलों को तैयार रहना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि पूरे सिस्टम को सिंगल विंडो सिस्टम पर लाना है, ताकि न्याय देने में देरी न हो। उन्होंने कहा कि मेरी चिंता सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में लंबित मामलों से ज्यादा निचली अदालत के मूलभूत ढांचा सुधारना है। सभी मुख्यमंत्री को मिलकर काम करना होगा। मैं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से सहमत हूं कि सभी सरकारों को मिलकर काम करना होगा।

किसी भी मामले के निपटारे में न लगे छह महीने से अधिक वक्त

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है और तेजी व सुलभ न्याय दिलाने के लिए इसे पूरे देश के सामने एक उदाहरण पेश करना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि ऐसा संयोग कम होता है जब केंद्र व दिल्ली सरकार के साथ सुप्रीम कोर्ट एक मंच पर हो। इसका फायदा उठाकर मैं एक प्रस्ताव रखना चाहता हूं कि दिल्ली को एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह सुनिश्चित कराया जाए कि सिविल और आपराधिक किसी भी मामले के निस्तारण में छह महीने से अधिक समय न लगे।

इसके लिए जो भी अनुदान चाहिए, दिल्ली सरकार देने को तैयार है।उन्होंने कहा कि दिल्ली की न्यायिक व्यवस्था की मूलभूत सुविधाएं देश मे सबसे बेहतर है।पिछली सरकारों ने भी काम किया है, लेकिन हमारी सरकार आने से पहले 500 करोड़ का अनुदान मिलता था। जबकि, पिछले सालों में हमने इसे बढ़ाकर 1500 करोड़ किया है। अभी शायद और कि जरूरत है और न्यायपालिका हमारी प्राथमिकता है और हम इस दिशा में हर संभव प्रयास करेंगे।

सी ब्लाक की खासियत

हाई कोर्ट के एस-ब्लाक को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है। इसमें हाई टेक व्यवस्था के साथ ही प्रशासनिक ब्लाक, 200 अधिवक्ताओं के चैंबर, आडिटोरियम के साथ ही 300 वाहनों को पार्क करने की व्यवस्था की गई है। इस इमारत का डिजाइन खास तरीके से किया गया है, कि यहां पर शुद्ध हवा व समेत अन्य सुविधा होगी।

Edited By: Abhi Malviya

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट