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Delhi Budget: आज पेश नहीं होगा दिल्ली का बजट, MHA ने लगाई रोक! पूछा- विज्ञापन पर इतनी राशि क्यों हो रही खर्च?

Delhi Budget 2023 अभूतपूर्व स्थिति के बीच दिल्ली का बजट आज विधानसभा में पेश नहीं होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बजट के लिए अनुमति नहीं दी है। इसके लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गृह मंत्रालय पर बजट रोकने का आरोप लगाया है।

By V K ShuklaEdited By: GeetarjunPublished: Tue, 21 Mar 2023 01:12 AM (IST)Updated: Tue, 21 Mar 2023 05:03 AM (IST)
आज पेश नहीं होगा दिल्ली का बजट, MHA ने लगाई रोक! पूछा- विज्ञापन पर इतनी राशि क्यों हो रही खर्च?

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। अभूतपूर्व स्थिति के बीच दिल्ली का बजट आज विधानसभा में पेश नहीं होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बजट के लिए अनुमति नहीं दी है। इसके लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गृह मंत्रालय पर बजट रोकने का आरोप लगाया है। उधर गृह मंत्रालय ने कहा है कि बजट को लेकर कुछ जानकारी दिल्ल्ली सरकार से मांगी गई थी जो दिल्ली सरकार की ओर से नहीं दी गई, इसलिए बजट को दिल्ली सरकार की ओर से ही रोका जा रहा है।

दिल्ली विधानसभा के 30 साल के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि दिल्ली सरकार का बजट तय तारीख पर पेश नहीं हो सकेगा। यह बजट मंगलवार यानी 21 मार्च को पेश किया जाना था।

बजट पेश होने से पहले हुआ विवाद

दिल्ली विधानसभा का 17 मार्च से बजट सत्र चल रहा है, दिल्ली कैबिनेट ने बजट की तारीख के बारे में कुछ दिन पहले फैसला लिया। इसके लिए दिल्ली सरकार की पूरी तैयारी हो चुकी है। मगर बजट पेश करने से एक दिन पहले बजट को लेकर विवाद हो गया है।

बजट को लेकर एलजी दफ्तर ने कहा है कि गत नौ मार्च को कुछ टिप्पणियों के साथ एन्युअल फाइनेंसिशल स्टेटमेंट 2023-2024 को मंजूरी देकर फाइल मुख्यमंत्री के पास भेज दी थी।

एलजी कार्यालय को नहीं मिलीं टिप्पणियां

इसके बाद दिल्ली सरकार ने बजट के लिए गृह मंत्रालय को एक पत्र भेजकर राष्ट्रपति की मंजूरी मांगी थी जो कानूनन रूप से अनिवार्य है। फाइल भेजी गई तो गृह मंत्रालय ने मंजूरी के संबंध में गत 17 मार्च को दिल्ली सरकार को अपनी कुछ टिप्पणियों से अवगत कराया गया। लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से उपराज्यपाल कार्यालय को बजट पर मांगी गई टिप्पणियां नहीं दी गईं।

देर रात गए राजनिवास ने बताया कि कुछ समय पहले फाइल एलजी सचिवालय में रात 9:25 बजे प्राप्त हुई और कानून के अनुसार, आगे की कार्रवाई के लिए एलजी की मंजूरी के बाद रात 10:05 बजे मुख्यमंत्री को वापस भेज दी गई।

विज्ञापन राशि खर्च करने का मांगा स्पष्टीकरण

उधर गृह मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि दिल्ली सरकार के बजट में विज्ञापन पर बहुत ज्यादा राशि का प्रविधान किया गया है। इसकी तुलना में आधारभूत ढांचे पर ज्यादा जोर नहीं है। दिल्ली सरकार से इसका कारण पूछा गया था, लेकिन जवाब नहीं मिला। इस कारण तकनीकी आधार पर बजट पेश करने की अनुमति नहीं मिल पाई। जैसे ही दिल्ली सरकार की ओर से विज्ञापन पर अधिक खर्च का स्पष्टीकरण आ जाएगा। बजट को मंजूरी दे दी जाएगी।

दिल्ली सरकार को ठहराया जिम्मेदार

गृहमंत्रालय के सूत्रों ने बजट नहीं पेश हो पाने के लिए दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराया। वित्त मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा दिल्ली सरकार से ज़ुड़े सूत्रों ने कहा कि गृह मंत्रालय झूठ बोल रहा है। आगामी वित्त वर्ष के लिए 78800 का कुल बजट है। उसमें ढांचागत विकास के लिए पूंजीगत व्यय के रूप में 22,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

वित्त मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा है कि भारत के इतिहास में पहली बार है कि गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार को 2023-24 के लिए अपना वार्षिक बजट निर्धारित तिथि 21 मार्च को पेश करने से रोक दिया है। उन्होंने कहा कि अब पता चला है कि गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के बजट पर कुछ चिंता जताई थी और गत 17 मार्च को मुख्य सचिव को भेजे पत्र के जरिए इसे मंजूरी देने से इंकार कर दिया था।

वित्त मंत्री गहलोत ने आरोप लगाया कि रहस्यमय कारणों से दिल्ली के मुख्य सचिव ने पत्र को तीन दिन तक छिपा कर रखा। उन्होंने कहा कि मुझे पत्र के बारे में आज यानी 20 मार्च 2023 को दोपहर 2 बजे ही पता चला। गृह मंत्रालय के पत्र वाली फाइल मेरे पास आधिकारिक तौर पर आज शाम छह बजे यानी दिल्ली विधानसभा में बजट पेश होने के ठीक एक दिन पहले पेश की गई।

इसके बाद हमने गृह मंत्रालय की चिंताओं का जवाब दिया है और सीएम की मंजूरी के बाद आज रात 9 बजे दिल्ली के एलजी को फाइल वापस सौंप दी है। दिल्ली के बजट में देरी करने में दिल्ली के मुख्य सचिव और वित्त सचिव की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि गृह मंत्रालय दिल्ली सरकार के बजट के बारे में झूठ फैला रहा है। अगले वर्ष पूंजीगत व्यय के लिए लगभग 22,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि विज्ञापनों के लिए आवंटन केवल 550 करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष के समान है।गृह मंत्रालय द्वारा उठाई गई चिंताएं अप्रासंगिक हैं और दिल्ली सरकार के अगले साल के बजट को बिगाड़ने के लिए ऐसा प्रतीत होता है।


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