नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। फिल्मिस्तान के पास अनाज मंडी स्थित फैक्ट्री में आग की लपटों के बीच हैदर जांबाज की तरह अंदर घुसा और तीन बेहोश पड़े लोगों को बाहर निकाला। हालांकि, जिन भाइयों को बचाने के लिए वह फैक्ट्री में पहुंचे थे, उन तक पहुंचने से पहले ही जहरीले धुएं ने उनको बेहोश कर दिया। नतीजतन अस्पताल में जब उनकी आंख खुली तो तीनों भाइयों की आंखें सदा के लिए बंद हो चुकी थीं।

इसमें एक उनका सगा भाई बबलू है, जबकि दो चचेरे भाई राजू और तौकीर हैं। हैदर को अफसोस है कि अगर कुछ देर और उसका शरीर साथ देता तो शायद अपने किसी भाई को वह बचाने में कामयाब हो जाता।

बुराड़ी निवासी हैदर अली के मुताबिक रविवार की सुबह करीब 4:45 बजे भाई बबलू ने फोन करके कहा कि बिल्डिंग में भयानक आग लगी है और हम फंस चुके हैं। बस तुम जल्दी आ जाओ और बचा लो। यह सुनते ही उनके हाथ पैर फूल गए। बाइक के माध्यम से घटनास्थल पर आधे घंटे में पहुंच गया। वहां पहुंचकर देखा तो बिल्डिंग धूं धूं कर जल रही थी। पुलिस व दमकल विभाग की तीन से चार गाड़ियां मौजूद थीं।

हर तरफ चीत्कार मची हुई थी, ऐसे में भाइयों को बचाने के लिए बिल्डिंग में प्रवेश करने का प्रयास किया तो पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद दमकल विभाग के पानी का पाइप लेकर आग को बुझाते हुए बिल्डिंग में प्रवेश कर गया। पीछे से दमकल विभाग के दो अधिकारी भी भागकर आए। अंदर हर तरफ धुंआ था, कुछ लोग बेहोश थे। ऐसे में एक-एक कर हैदर ने तीन बेसुध लोगों को सीढ़ियों के पास लाकर छोड़ा।

इस बीच धुआं फेफड़ों में भर गया कि चक्कर आने लगे और उल्टी हो रही थी। भाइयों को बचाने के लिए जैसे ही वह तीसरी मंजिल की तरफ दौड़ा तो बेहोश होकर गिर पड़ा। आंख खुली तो खुद को बिल्डिंग के बाहर पाया। जब पुलिस से अपने भाइयों के बारे में पता किया तो उन्होंने अस्पताल पहुंचने के लिए कहा। यहां देखा तो जिन्हें बचाने के लिए दौड़ा था वे ही काल के गाल में समा गए।

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Posted By: Mangal Yadav

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