नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। सघन गलियों में चलते उद्योग, होटल और कारोबार में आग लगने की एक छोटी घटना ही कई जाने लील लेती है। आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में पांच सालों में (2013-14 से 2018-19) तक में आग लगने की एक लाख 41 हजार 303 घटनाएं हुई, जिसमें 1974 लोगों को जान गंवानी पड़ी, जबकि 11817 लोगों को आग की लपटों ने ऐसा झुलसाया की, उसका कुप्रभाव उनके जीवन पर आज तक है।

यह स्थिति तब है जब यह देश की राजधानी है और यहां सबसे उन्नत आग से बचाव के साधन उपलब्ध होने का दावा किया जाता है। इसके बावजूद भी आग नहीं बुझ रही, बल्कि वह नियमित तौर पर दिल्ली को झुलसा रही है।

सियासत और भ्रष्टाचार जिम्मेदार

रिहायशी इलाकों में इन अवैध फैक्टि्रयों के अबाध संचालन में सियासत और भ्रष्टाचार जिम्मेदार है, इसलिए अधिकारी भी इन पर कार्रवाई से कतराते हैं। सियासत को चंदा मिलता है तो ये वोट बैंक भी है। वहीं, दिल्ली पुलिस, नगर निगम, अग्निशमन व श्रम विभाग के भी हाथ गर्म होते हैं। ऐसे में एक-एक इकाइयों में एक साथ सैकड़ों मजदूर जान हथेली पर रखकर काम कर रहे होते हैं। इसके बाद धड़ल्ले से खतरनाक श्रेणी की इकाइयां दिल्ली के किसी गली में धड़ल्ले से चल रही होती हैं।

Posted By: Mangal Yadav

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