नई दिल्ली, जेएनएन। अदालत में कार्रवाई लंबित होने के बावजूद विदेशी महिला से जब्त किए गए चार किलो सोने को बेचने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने सीमा शुल्क विभाग को आदेश दिया है कि वह विदेशी महिला को 94 लाख रुपये का भुगतान करे। न्यायमूर्ति एस मुरलीधर व न्यायमूर्ति आइएस मेहता की पीठ ने विभाग को 30 जून तक का समय दिया है।

अगर उक्त तारीख तक भुगतान नहीं किया गया तो अधिकारियों को विलंब अवधि के लिए 6 फीसद ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। पीठ ने सीमा शुल्क आयुक्त (एयरपोर्ट एंड जनरल) के उस आदेश को भी रद कर दिया, जिसमें उन्होंने विदेशी महिला का सोना जब्त कर उस पर 18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

पीठ ने सीमा शुल्क अधिकारियों से सवाल किया कि जब्त सोने का निपटारा क्यों किया गया, जबकि वह न तो खराब था और न ही नुकसानदायक था। इसका अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। पीठ ने कहा कि पूरे मामले में महिला को बिना कारण बताओ नोटिस जारी कर जिस तरह से आदेश दिए गए वे आधारहीन हैं।

महिला ने दावा किया था कि उसने अपनी कार बेचने और रिश्तेदारों से कुछ लोन लेने के बाद यह सोना केन्या से खरीदा था। वह जब 5 जनवरी 2015 को नैरोबी से आइजीआइ एयरपोर्ट पर पहुंची तो उसे रोक कर सोने के बारे में पूछा गया। उसने जब सोने के बारे में पुष्टि कर उसे बैग से निकाला तो सीमा शुल्क विभाग ने जब्त कर लिया।

जब सोना उसे वापस नहीं किया गया और कारण बताओ नोटिस भी जारी नहीं किया गया तो उसने अप्रैल 2018 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की। पीठ ने कहा कि अधिकारियों के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना जब्त किए गए सोने का निपटारा क्यों किया गया।

 

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