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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 18, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दिल्ली पर मंडरा रहा बढ़ते ओजोन प्रदूषण का खतरा, क्या है CSE की रिपोर्ट?

Published: Wed, 18 Jun 2025 02:49 PM (IST)

सेंटर फार साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में ओजोन प्रदूषण का खतरा ...और पढ़ें

इस साल गर्मियों में दिल्ली में लगभग हर दिन अधिक रहा ओजोन प्रदूषण का स्तर : सीएसई
इस साल गर्मियों में दिल्ली में लगभग हर दिन अधिक रहा ओजोन प्रदूषण का स्तर : सीएसई

HighLights

  1. दिल्ली में ओजोन प्रदूषण सुरक्षित सीमा से ऊपर
  2. गर्मी में ओजोन का स्तर अधिक रहा
  3. दक्षिण दिल्ली सबसे ज्यादा प्रभावित

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने अपनी नई रिपोर्ट में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में ओजोन प्रदूषण के बढ़ते खतरे को लेकर चेताया है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस साल गर्मियों के दौरान दिल्ली में करीब-करीब हर दिन ओजोन प्रदूषण का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर रहा। दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में भी उन दिनों की संख्या बढ़ी है, जब हवा में ओजोन प्रदूषण हावी था।

ओजोन कोई सीधे तौर पर उत्सर्जित होने वाला प्रदूषक नहीं है, यह सूर्य की रोशनी में नाइट्रोजन ऑक्साइड, वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड (वीओसी) और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसों के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है।

क्या कहती है रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में मार्च से मई 2025 के बीच हर दिन ओजोन का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक रहा।  28 अप्रैल को सबसे खराब दिन रहा, जब क्षेत्र के 58 में से 32 निगरानी स्टेशनों में ओजोन का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर दर्ज किया गया।

वहीं जब दिल्ली-एनसीआर के शहरों के अलग-अलग देखा गया तो स्थानीय स्तर पर अलग ही रुझान सामने आए। दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदूषण 13 अप्रैल को दर्ज किया गया, जब ओजोन का औसत स्तर 135 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। इस दौरान 39 में से 25 स्टेशनों पर ओजोन का स्तर तय सीमा से अधिक रिकार्ड किया गया।

एनसीआर में 25 अप्रैल को ओजोन का स्तर 139 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया। इस दौरान एनसीआर के अन्य शहरों में 83 दिनों तक ओजोन का स्तर तय सीमा से अधिक दर्ज किया गया। 18 और 28 अप्रैल को एनसीआर के 10 में से 9 स्टेशनों ने सीमा से अधिक स्तर दर्ज किया।

दिल्ली के ये इलाके रहे सबसे अधिक प्रभावित

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गर्मियों के दौरान उत्तर-पश्चिम और दक्षिण दिल्ली में बढ़ते ओजोन से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। वहीं गाजियाबाद और नोएडा एनसीआर के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल थे।

इस साल औसतन करीब 19 मानिटरिंग स्टेशनों ने रोजाना मानकों से अधिक स्तर दर्ज किया, जोकि पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक है। इस साल इसमें 6.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस गर्मी, ओजोन का स्तर रोजाना औसतन 14.2 घंटे तक हवा में बना रहा, जोकि पिछले साल 12 घंटों से कहीं अधिक है।

इस गर्मी दिल्ली में ओजोन प्रदूषण का फैलाव बढ़कर औसतन 15.1 स्टेशनों तक पहुंच गया, जो पिछले साल के 13.2 स्टेशनों से अधिक है। ओजोन प्रदूषण का समय भी बढ़कर औसतन 12 घंटे हो गया।

एनसीआर में ओजोन का प्रसार हुआ कम

दूसरी तरफ एनसीआर के शहरों में ओजोन का स्थानीय प्रसार कम हुआ है, जो इस साल औसतन 3.6 स्टेशनों पर रहा, जबकि पिछले साल यह 4.4 स्टेशनों पर था।

दक्षिणी दिल्ली का नेहरू नगर सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका रहा। मार्च से मई तक सभी 92 दिनों में यहां ओजोन का स्तर तय सीमा से ऊपर रहा। इसके बाद नजफगढ़, ओखला फेज-2, अशोक विहार, आया नगर और वज़ीरपुर भी ज्यादा प्रभावित रहे।

सीएसई की कार्यकारी निदेशक और क्लीन एयर प्रोग्राम की प्रमुख अनुमिता रायचौधरी ने कहा कि वाहनों, उद्योगों और कचरे के जलने से निकलने वाली गैसें ओजोन के बनने में योगदान करती हैं, लेकिन नीतियों में इन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

सीएसई ने सुझाव दिया है कि ओजोन को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) में शामिल किया जाना चाहिए। वाहनों और उद्योगों से होने वाले उत्सर्जन को रोकने के लिए स्वच्छ ईंधन और तकनीक को बढ़ावा दिया जाए।