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Delhi Floods: राजनिवास का दावा- CM केजरीवाल ने बाढ़ रोकने और तैयारियों को लेकर दो साल से नहीं की बैठक

बाढ़ का सामना कर रही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बीच राजनिवास ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली बाढ़ नियंत्रण और तैयारियों के लिए शीर्ष समिति की पिछले दो वर्षों में बैठक नहीं हुई है। आप सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा आतिशी और सौरभ भारद्वाज की अध्यक्षता में बाढ़ की तैयारियों पर चर्चा के लिए बैठक 9 मई को हुई थी।

By Jagran NewsEdited By: GeetarjunPublished: Sun, 16 Jul 2023 07:05 PM (IST)Updated: Sun, 16 Jul 2023 07:05 PM (IST)
राजनिवास का दावा- CM केजरीवाल ने बाढ़ रोकने और तैयारियों को लेकर दो साल से नहीं की बैठक

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो। दिल्ली में आई बाढ़ पर छिड़ी रार के बीच अब राजनिवास ने कहा है कि सीएम अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता वाली शीर्ष समिति, जो बाढ़ नियंत्रण और तैयारी के लिए बनाई गई थी, की पिछले दो वर्षों से एक भी बैठक नहीं हुई। बकौल राजनिवास, सर्वोच्च समिति की बैठक दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, सेना व केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) सहित विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करती है।

राजनिवास अधिकारियों का कहना है कि इस समिति की अनिवार्य बैठक बुलाने के लिए एक फाइल सीएम को सौंपी गई थी, लेकिन बाढ़ नियंत्रण से संबंधित इस महत्वपूर्ण फाइल को देखने तक का फैसला उन्होंने नहीं किया।

पूर्वी जिले के डीएम, जो इस शीर्ष समिति के नोडल अधिकारी हैं, द्वारा 19 जून को स्थानांतरित की गई एक फाइल पर, मंडलायुक्त- जो समिति के संयोजक भी हैं, ने 21 जून को सीएम केजरीवाल से सुझाव देने का अनुरोध किया। जून के अंतिम सप्ताह में सर्वोच्च समिति की अनिवार्य बैठक बुलाने के लिए उपयुक्त तारीख और समय भी मांगा।

फाइल राजस्व मंत्री आतिशी के माध्यम से सीएम को सौंपी गई थी। उनके अतिरिक्त सचिव, एक अपेक्षाकृत कनिष्ठ पदाधिकारी ने चार दिनों के बाद यानी 26 जून को आतिशी को यह टिप्पणी करते हुए फ़ाइल लौटा दी कि "मुख्यमंत्री की इच्छा है कि राजस्व मंत्री उस शीर्ष समिति की बैठक बुला सकते हैं, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं।

राजनिवास का कहना है कि इसके बाद जो हुआ वह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है। केजरीवाल ने 2.5 करोड़ दिल्लीवासियों की भलाई से जुड़ी यह जिम्मेदारी आतिशी पर डाल दी। इस पर उनके ओएसडी ने संभागीय आयुक्त को निर्देश दिया कि 30 जून को शाम 6:30 बजे संभागीय आयुक्त, पीआर के साथ उनके सम्मेलन कक्ष में बाढ़ नियंत्रण आदेश जारी करने के लिए एक छोटी बैठक (शीर्ष समिति नहीं) करें।

बैठक में सचिव (बाढ़ एवं सिंचाई नियंत्रण विभाग), डीएम (पूर्व) और मुख्य अभियंता को भी बुलाने को कहा गया। आतिशी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सीडब्ल्यूसी के प्रतिनिधियों के अलावा मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त, एमसीडी आयुक्त, सीईओ जल बोर्ड और कई अन्य महत्वपूर्ण हितधारकों की उपस्थिति नहीं थी। क्योंकि उनसे बैठक में मौजूद रहने के लिए कहा ही नहीं गया था।

यहां तक कि बाढ़ एवं सिंचाई नियंत्रण विभाग और जल बोर्ड के प्रभारी मंत्री सौरभ भारद्वाज भी बैठक में नहीं बुलाए गए। तदनुसार डीएम कार्यालय ने 30 जून को आयोजित होने वाली इस "छोटी बैठक" के लिए 27 जून को एक नोटिस जारी किया, लेकिन यह बैठक तब भी नहीं हुई। आतिशी ने बीमारी की छुट्टी ले ली थी।

डीएम कार्यालय ने पांच जुलाई को छह जुलाई के लिए फिर से "छोटी बैठक" का नोटिस जारी किया, जिसके बाद मुख्य हितधारकों को विश्वास में लिए बिना एक अनौपचारिक बाढ़ नियंत्रण आदेश जारी कर दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि शीर्ष समिति की बैठक हुई ही नहीं।

शीर्ष समिति के संचालन में शामिल हैं-

  • खतरे के स्तर की निगरानी करना
  • चेतावनियां देना
  • हथिनीकुंड से पानी का डिस्चार्ज यमुना में एक लाख क्यूसेक और नजफगढ़ ड्रेन में 35,000 क्यूसेक से अधिक होने पर पहली चेतावनी
  • हथिनीकुंड से पानी यमुना में तीन लाख क्यूसेक और नजफगढ़ ड्रेन में 70,000 क्यूसेक से अधिक होने पर दूसरी चेतावनी
  • हथिनीकुंड से यमुना में पांच लाख क्यूसेक और नजफगढ़ ड्रेन में एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी हो जाने पर तीसरी चेतावनी
  • सेना से सहायता की गुहार
  • नियामकों, बांधों और निचले क्षेत्रों जैसे संवेदनशील बिंदुओं की सुरक्षा करना।

बाढ़ नियंत्रण तैयारियों के मुद्दे पर दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया

दिल्ली सरकार ने कहा है कि सरकार मई में ही बाढ़ और जल भराव के मुद्दों की नियमित समीक्षा कर रही थी। नौ मई को सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग मंत्री सौरभ भारद्वाज और लोक निर्माण मंत्री आतिशी ने संयुक्त रूप से एक बैठक की अध्यक्षता की। इसमें लोक निर्माण विभाग, एमसीडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, डीडीए और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद सहित सभी विभाग उपस्थित थे। जिसमें बाढ़ और जलभराव की तैयारियों की समीक्षा की गई।

उसके बाद बाढ़ और जलभराव से संबंधित किसी भी समस्या के समाधान के लिए नियमित अंतरविभागीय बैठकें होती रही हैं। मुख्यमंत्री स्वयं भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। बाढ़ नियंत्रण आदेश भी दिल्ली के पिछले सालों के आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए उचित प्रक्रिया के अनुसार जारी किया गया था।


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