पश्चिमी दिल्ली, गौतम कुमार मिश्रा। सेरीब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) से पीड़ित बेटी को इलाज के लिए कनाडा ले जाने की कोशिश एक पिता को महंगी पड़ी। कनाडा जाना तो दूर की बात यह शख्स वीजा पाने के चक्कर में करीब 12 लाख रुपये गंवा चुका है। पीड़ित पिता की शिकायत पर हरिनगर थाना पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ ठगी का मामला दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

पीड़ित मंजीत ने शिकायत में बताया कि उनकी गुरुद्वारा परिसर में एक दुकान है। यहां अक्सर हरमन व हरप्रीत आते थे। इन्होंने एक दिन मंजीत को विजिटिंग कार्ड दिया और बोले कि इनका विदेश में लोगों को भेजने का काम है। मंजीत ने इन्हें बेटी के बारे में बताया और कहा कि उसे इलाज के लिए कनाडा लेकर जाना है। इसके बाद मंजीत हरमन व हरप्रीत के पीतमपुरा स्थित कार्यालय गए और वीजा दिलाने की बात की। बात के अनुसार मंजीत ने उन्हें अपने परिवार के चार सदस्यों का पासपोर्ट व अन्य कागजात दिए।

आरोप है कि इसके कुछ दिनों बाद हरमन व हरप्रीत ने मंजीत को नकली वीजा दिखाया और करीब छह लाख रुपये ले लिए। इसके बाद जब मंजीत ने इनसे पासपोर्ट व वीजा की मांग की तो कहा गया कि अभी केवल अन्य लोगों का वीजा नहीं बन सका है। इकट्ठे ही सभी का वीजा इन्हें सौंप दिया जाएगा। कुछ दिनों बाद मंजीत को आरोपित हरप्रीत व हरमन ने कहा कि परिवार के अन्य सदस्यों की वीजा बनने में कुछ दिक्कतें सामने आई हैं। इन्हें दूर करने के नाम पर फिर इन्होंने मंजीत से छह लाख रुपये ले लिए।

मंजीत का आरोप है कि इसके बाद बार-बार अनुरोध के बावजूद इन्हें वीजा नहीं मिला। जब ये आरोपितों को फोन करते थे तो वे फोन नहीं उठाते। उठाने पर फोन पर ही अभद्रता करते थे। इन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी के साथ भी ये अभद्रता करते थे। कई बार आरोपित इन्हें हरिनगर के जेल रोड पर बुलाते और जब पीड़ित वहां पहुंचता तो घंटों इंतजार के बाद भी आरोपित नहीं आते थे। अब पीड़ित ने पुलिस से इस मामले में गुहार लगाई है कि उन्हें आरोपितों के पास से उनका पासपोर्ट, जमा कराए गए सभी कागजात व उनके करीब 12 लाख रुपये वापस दिलाए जाएं। पुलिस के अनुसार यह मामला वर्ष 2017 का है। शिकायत मिलने के बाद छानबीन के बाद ठगी की धारा के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की छानबीन जारी है।

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